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फिन्ना सिंह सिंचाई परियोजना को कांग्रेस ने किया नजर अंदाज : पठानिया
Thu, 22 Aug 2024 05:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 22 Aug 2024 05:01 AM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया ने बुधवार को नूरपुर में पत्रकार वार्ता में कहा कि नूरपुर हलके के तहत 204.51करोड़ की बहुआयामी फिन्ना सिंह सिंचाई नहर परियोजना को कांग्रेस सरकारों ने हमेशा से ही नजरअंदाज किया है। अब जबकि केंद्रीय मंत्रालय की ओर उक्त महात्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए शेष 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर मंजूरी मिलने पर कांग्रेस नेता अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। असलियत में भाजपा सरकारों के दौरान लगभग 234.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने शासनकाल (2012-2017) के दौरान लगभग 45 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे। पठानिया ने कहा कि बेशक फिन्ना सिंह प्रोजेक्ट पूर्व मंत्री स्वर्गीय सत महाजन का सपना रहा है और उन्होंने इस बनाने के प्रयास भी किए परंतु इसका शिलान्यास तथा आगे बढ़ाने का प्रयास भाजपा कार्यकाल में हुआ है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में जब वह 2007 से 2012 तक विधायक थे, इस सिंचाई परियोजना को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012 में शिलान्यास किया और भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2017 -2022 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (2017-2022) ने भी इसका कार्यान्वन किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन और केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भाजपा कार्यकाल में उन्होंने और पूर्व सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री मोहिंदर सिंह ठाकुर ने कड़े प्रयास शुरू किए थे और बहुआयामी सिंचाई परियोजना के रूप में इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को संशोधित करके इसे 2019 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) में लाया था। संशोधित डीपीआर के लिए केंद्रीय मंजूरी पाने के लिए पिछली भाजपा राज्य सरकारों ने परियोजना लागत के कुल निर्माण का पचास प्रतिशत हिस्सा खर्च करने की अनिवार्य शर्त पूरी की थी। उन्होंने परियोजना के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए पूर्व में रही रही धूमल और जयराम सरकारों की भूमिका की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में जब वह 2007 से 2012 तक विधायक थे, इस सिंचाई परियोजना को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012 में शिलान्यास किया और भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2017 -2022 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (2017-2022) ने भी इसका कार्यान्वन किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन और केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भाजपा कार्यकाल में उन्होंने और पूर्व सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री मोहिंदर सिंह ठाकुर ने कड़े प्रयास शुरू किए थे और बहुआयामी सिंचाई परियोजना के रूप में इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को संशोधित करके इसे 2019 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) में लाया था। संशोधित डीपीआर के लिए केंद्रीय मंजूरी पाने के लिए पिछली भाजपा राज्य सरकारों ने परियोजना लागत के कुल निर्माण का पचास प्रतिशत हिस्सा खर्च करने की अनिवार्य शर्त पूरी की थी। उन्होंने परियोजना के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए पूर्व में रही रही धूमल और जयराम सरकारों की भूमिका की सराहना की।
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