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Kangra News: केंद्रीय बजट के विरोध में धर्मशाला में गरजी सीटू
Thu, 06 Feb 2025 01:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 06 Feb 2025 01:44 AM IST
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धर्मशाला में केेंद्रीय बजट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान रैली निकालते सीटू पदाधिकारी और विभिन्न
धर्मशाला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुधवार को धर्मशाला में सीटू से जुड़ी यूनियनों ने केंद्र सरकार के वर्ष 2025-26 के बजट के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान सीटू पदाधिकारियों ने कागज पर लिखी बजट की घोषणाओं को भी जलाया। सीटू के जिला वित्त सचिव अशोक कटोच ने कहा कि भले ही सरकार ने बजट पेश करते समय सब का साथ, सबका विकास जैसे भ्रामक जुमले का प्रयोग किया है, लेकिन साफ दिखता है कि बजट की दिशा कारपोरेट समर्थक है। इसका दृष्टिकोण आम जनता विरोधी है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर राष्ट्रीय संपत्ति सेवा उपक्रम बुनियादी ढांचे और देश के बहुमूल्य संसाधनों को केंद्र सरकार अपने मित्र कारपोरेट घरानों को सौंप रही है।
उन्होंने कहा कि बजट में परमाणु ऊर्जा एवं कृषि जैसे संबंधित स्वदेशी क्षेत्र को भी निजी कारपोरेट के हाथों में सौंप देने की बात कही गई है। बीमा और बिजली के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को इजाजत का प्रस्ताव है। आर्थिक सर्वेक्षण ने पुष्टि की है कि कारपोरेट के मुनाफे 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद न तो निजी निवेश बढ़ा है और न ही रोजगार सृजन हुआ है। देश की कुल कमाई में पूंजीपतियों का हिस्सा 50 फीसदी से ऊपर चला गया है, जबकि मजदूरों की आय लगातार सिकुड़ रही है। इससे आर्थिक मंदी गहरा रही है और ऐसे में जरूरत है कि आम जनता की खर्च की क्षमता बढ़ाने के लिए रोजगार सृजनकारी सार्वजनिक-निजी निवेश को बढ़ाया जाता, लेकिन यह बजट इसकी गारंटी देने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को कम करने का सरकार का दावा भी भ्रामक है। ऐसे करने के लिए कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बजट में कटौती करने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें ग्रामीण रोजगार 3302 करोड़, मनरेगा 3268 करोड़, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण 3390 करोड़, रेलवे बजट 0.07 लाख करोड़, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण वन योजना 2250 करोड़, मिड डे मील 300 करोड़ और खाद्य सब्सिडी में 8364 करोड़ की कटौती की गई है। आंगनबाड़ी के बजट में मात्र 150 करोड़ की मामूली वृद्धि की गई है, जो प्रति बच्चा मात्र 5 पैसे बैठती है। सीटू ने जन विरोधी और मजदूर विरोधी बजट प्रस्तावों की कड़ी निंदा करते हुए इन पर प्रदर्शन के माध्यम से विरोध किया। सीटू ने चेतावनी दी कि सरकार लेबर कोर्ट को लागू करने पर रोक लगाए। साथ ही मांग की गई की सरकार बजट में कल्याणकारी योजनाओं की कटौतियों को वापस ले और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से उठाई गई मांग के अनुसार बजट में प्रावधान करें।
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उन्होंने कहा कि बजट में परमाणु ऊर्जा एवं कृषि जैसे संबंधित स्वदेशी क्षेत्र को भी निजी कारपोरेट के हाथों में सौंप देने की बात कही गई है। बीमा और बिजली के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को इजाजत का प्रस्ताव है। आर्थिक सर्वेक्षण ने पुष्टि की है कि कारपोरेट के मुनाफे 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद न तो निजी निवेश बढ़ा है और न ही रोजगार सृजन हुआ है। देश की कुल कमाई में पूंजीपतियों का हिस्सा 50 फीसदी से ऊपर चला गया है, जबकि मजदूरों की आय लगातार सिकुड़ रही है। इससे आर्थिक मंदी गहरा रही है और ऐसे में जरूरत है कि आम जनता की खर्च की क्षमता बढ़ाने के लिए रोजगार सृजनकारी सार्वजनिक-निजी निवेश को बढ़ाया जाता, लेकिन यह बजट इसकी गारंटी देने में विफल रहा है।
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उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को कम करने का सरकार का दावा भी भ्रामक है। ऐसे करने के लिए कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बजट में कटौती करने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें ग्रामीण रोजगार 3302 करोड़, मनरेगा 3268 करोड़, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण 3390 करोड़, रेलवे बजट 0.07 लाख करोड़, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण वन योजना 2250 करोड़, मिड डे मील 300 करोड़ और खाद्य सब्सिडी में 8364 करोड़ की कटौती की गई है। आंगनबाड़ी के बजट में मात्र 150 करोड़ की मामूली वृद्धि की गई है, जो प्रति बच्चा मात्र 5 पैसे बैठती है। सीटू ने जन विरोधी और मजदूर विरोधी बजट प्रस्तावों की कड़ी निंदा करते हुए इन पर प्रदर्शन के माध्यम से विरोध किया। सीटू ने चेतावनी दी कि सरकार लेबर कोर्ट को लागू करने पर रोक लगाए। साथ ही मांग की गई की सरकार बजट में कल्याणकारी योजनाओं की कटौतियों को वापस ले और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से उठाई गई मांग के अनुसार बजट में प्रावधान करें।
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