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Kangra News: दाड़ी मेले में सरेआम बिक रहा प्रतिबंधित पॉलिथीन
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धर्मशाला। धुम्मू शाह मेला दाड़ी में सरेआम प्रतिबंधित पॉलिथीन का इस्तेमाल व्यापारी लोग सामान देने के लिए कर रहे हैं। मेले के बजाय क्षेत्र के घर-घर में यह प्रतिबंधित पॉलिथीन पहुंच रहे हैं लेकिन, दाड़ी में ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय होने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इतना ही नहीं पॉलिथीन इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों पर जुर्माना भी नहीं लगाया जा रहा है। मेले में तीन-चार दिन से काले रंग के प्रतिबंधित लिफाफे इस्तेमाल हो रहे हैं। मेले में जगह-जगह पुलिस जवान भी तैनात हैं, लेकिन वे भी इसे नजरअंदाज करते दिख रहे हैं। पॉलिथीन के इस्तेमाल पर सरकार ने पूर्ण रूप से रोक लगा रखी है।
इसका इस्तेमाल करते पाए जाने पर जुर्माने से लेकर जेल तक हो सकती है लेकिन फिर भी बाजारों में सरेआम इन लिफाफों का इस्तेमाल बेखौफ किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर दुनियाभर में इन दिनों अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। प्लास्टिक के पॉलिथीन पर रोक के बावजूद ये धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यही लिफाफे बाद में नालियों और खड्डों में फेंक दिए जाते हैं, जिससे पानी तो दूषित होता ही है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक के बैग में स्टोर किया या फिर इसमें रखी हुई खाद्य सामग्री जल्दी खराब होती है। वहीं, गंभीर बीमारियों को न्योता देती है। प्लास्टिक के तत्वों के भोजन में मिल जाने से अस्थमा, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक निर्माण के समय निकलने वाली जहरीली गैस पर्यावरण को प्रदूषित करती है। पॉलिथीन विघटित न होने से न केवल मानव जीवन, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है। यदि इसे जलाकर नष्ट किया जाए तो सीओ-2 और सीओ जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं। पॉलिथीन के उपयोग से पानी, हवा, मिट्टी जैसे प्राकृतिक कारक प्रदूषित हो रहे हैं।
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- दाड़ी मेले में प्रतिबंधित पॉलिथीन के इस्तेमाल की रोकथाम के लिए टीम को निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेला अधिकारी एवं एसडीएम धर्मशाला को भी जांच के लिए कहा है। - वरुण गुप्ता, असिस्टेंट एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, कांगड़ा।
- दाड़ी में अगर प्रतिबंधित प्लास्टिक या पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। इसकी जांच के लिए टीम को निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी दुकानदार के पास प्रतिबंधित पॉलिथीन पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। - संजीव भोट, मेला अधिकारी एवं एसडीएम धर्मशाला।
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इसका इस्तेमाल करते पाए जाने पर जुर्माने से लेकर जेल तक हो सकती है लेकिन फिर भी बाजारों में सरेआम इन लिफाफों का इस्तेमाल बेखौफ किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर दुनियाभर में इन दिनों अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। प्लास्टिक के पॉलिथीन पर रोक के बावजूद ये धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यही लिफाफे बाद में नालियों और खड्डों में फेंक दिए जाते हैं, जिससे पानी तो दूषित होता ही है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक के बैग में स्टोर किया या फिर इसमें रखी हुई खाद्य सामग्री जल्दी खराब होती है। वहीं, गंभीर बीमारियों को न्योता देती है। प्लास्टिक के तत्वों के भोजन में मिल जाने से अस्थमा, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक निर्माण के समय निकलने वाली जहरीली गैस पर्यावरण को प्रदूषित करती है। पॉलिथीन विघटित न होने से न केवल मानव जीवन, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है। यदि इसे जलाकर नष्ट किया जाए तो सीओ-2 और सीओ जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं। पॉलिथीन के उपयोग से पानी, हवा, मिट्टी जैसे प्राकृतिक कारक प्रदूषित हो रहे हैं।
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- दाड़ी मेले में प्रतिबंधित पॉलिथीन के इस्तेमाल की रोकथाम के लिए टीम को निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेला अधिकारी एवं एसडीएम धर्मशाला को भी जांच के लिए कहा है। - वरुण गुप्ता, असिस्टेंट एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, कांगड़ा।
- दाड़ी में अगर प्रतिबंधित प्लास्टिक या पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। इसकी जांच के लिए टीम को निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी दुकानदार के पास प्रतिबंधित पॉलिथीन पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। - संजीव भोट, मेला अधिकारी एवं एसडीएम धर्मशाला।