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शिंदे के डैमेज कंट्रोल में निकली सीएम की भड़ास
Updated Wed, 16 Aug 2017 11:44 PM IST
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धर्मशाला। धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान हिमाचल कांग्रेस के नए प्रभारी सुशील कुमार शिंदे जहां सुक्खू और वीरभद्र के हालिया तल्ख राजनीतिक रिश्तों में सियासी मिठास घोलते हुए डैमेज कंट्रोल करते नजर आए, वहीं मुख्यमंत्री की अपने भाषण के दौरान अपनी ही पार्टी के विरोधियों पर भड़ास निकल ही गई। सीएम की भड़ास से उपजी अंतर्विरोध की चिंगारी को इंडोर स्टेडियम के सभागार में कार्यकर्ताओं के नारे और ज्यादा सुलगा रहे थे।
सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि भितरघात करने वाला चाहे बड़ा लीडर हो या छोटा बख्शा नहीं जाएगा। अपनी पार्टी के कुछ नेताओं पर पार्टी में रह कर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर सीएम ने शिंदे के शांति के पैगाम को राजनीतिक शर्तों के साथ ही स्वीकार करने का संदेश दिया। सुक्खू ने सभागार में जरूर सीएम की तारीफों के पुल बांधे, लेकिन सभागार के अंदर और बाहर तक दोनों नेताओं ने एक दूसरे से सीधी बात करने से परहेज ही किया। हालांकि, शिंदे ने सुक्खू और सीएम को अपने अगल बगल में बिठाकर एकजुटता का संदेश जरूर देने की कोशिश की। सुक्खू ने सुधीर शर्मा की तारीफ भी जमकर की और कह दिया कि मंत्री जी हंसते हंसते सब कुछ धर्मशाला ले जा रहे हैं और मिलते हैं नहीं। सुक्खू के इन शब्दों के जानकार अपने-अपने अर्थ निकालते रहे। धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन पूरी तरह से सुधीर शर्मा का सियासी मेघा शो बन गया, जिसमें लोगों की नजरें परिवहन मंत्री जीएस बाली को ढूंढती रहीं। राहुल गांधी की धर्मशाला रैली के बाद बाली लगातार सीएम के कांगड़ा दौरों से दूरी बनाते जा रहे हैं। हालांकि, बाली वीरवार को नगरोटा में शिंदे का कार्यक्रम कर अपना ही सियासी मेघा शो करेंगे। सीएम ने भितरघात करने वाले किन बड़े नेताओं को घर बिठाने की बात कही, इसके भी राजनीतिक अर्थ सभागार में अपने अपने विवेकानुसार लोग निकालते रहे। धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन में हजारों की भीड़ जुटाकर सुधीर शर्मा ने सीएम और शिंदे के सामने सियासी ताकत दिखाई, लेकिन शिंदे के भाषण शुरू होते ही महिलाएं जब उठना शुरू हो गई तो मैनेजमेंट टीम के पसीने छूट गए। सभागार में भीड़ का करीब 90 फीसदी हिस्सा महिलाओं से भरा पड़ा था जिसे देखकर सीएम और शिंदे बागबाग हो गए। अब वीरवार को बाली के सियासी मेघा शो पर जानकारों की नजरें टिकी हैं।
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सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि भितरघात करने वाला चाहे बड़ा लीडर हो या छोटा बख्शा नहीं जाएगा। अपनी पार्टी के कुछ नेताओं पर पार्टी में रह कर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर सीएम ने शिंदे के शांति के पैगाम को राजनीतिक शर्तों के साथ ही स्वीकार करने का संदेश दिया। सुक्खू ने सभागार में जरूर सीएम की तारीफों के पुल बांधे, लेकिन सभागार के अंदर और बाहर तक दोनों नेताओं ने एक दूसरे से सीधी बात करने से परहेज ही किया। हालांकि, शिंदे ने सुक्खू और सीएम को अपने अगल बगल में बिठाकर एकजुटता का संदेश जरूर देने की कोशिश की। सुक्खू ने सुधीर शर्मा की तारीफ भी जमकर की और कह दिया कि मंत्री जी हंसते हंसते सब कुछ धर्मशाला ले जा रहे हैं और मिलते हैं नहीं। सुक्खू के इन शब्दों के जानकार अपने-अपने अर्थ निकालते रहे। धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन पूरी तरह से सुधीर शर्मा का सियासी मेघा शो बन गया, जिसमें लोगों की नजरें परिवहन मंत्री जीएस बाली को ढूंढती रहीं। राहुल गांधी की धर्मशाला रैली के बाद बाली लगातार सीएम के कांगड़ा दौरों से दूरी बनाते जा रहे हैं। हालांकि, बाली वीरवार को नगरोटा में शिंदे का कार्यक्रम कर अपना ही सियासी मेघा शो करेंगे। सीएम ने भितरघात करने वाले किन बड़े नेताओं को घर बिठाने की बात कही, इसके भी राजनीतिक अर्थ सभागार में अपने अपने विवेकानुसार लोग निकालते रहे। धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन में हजारों की भीड़ जुटाकर सुधीर शर्मा ने सीएम और शिंदे के सामने सियासी ताकत दिखाई, लेकिन शिंदे के भाषण शुरू होते ही महिलाएं जब उठना शुरू हो गई तो मैनेजमेंट टीम के पसीने छूट गए। सभागार में भीड़ का करीब 90 फीसदी हिस्सा महिलाओं से भरा पड़ा था जिसे देखकर सीएम और शिंदे बागबाग हो गए। अब वीरवार को बाली के सियासी मेघा शो पर जानकारों की नजरें टिकी हैं।
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