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जिला कांगड़ा में 3694 बच्चे अभी भी कुपोषण का शिकार

Wed, 01 Sep 2021 12:11 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 12:11 AM IST
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3694 children still suffering from malnutrition
धर्मशाला। कुपोषण से लड़ने के लिए सरकार की तरफ से किए जा रहे विभिन्न प्रयासों के बावजूद आज भी जिला कांगड़ा में 3694 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें से 194 बच्चे तीव्र और 3500 बच्चे अल्प कुपोषण से पीड़ित हैं।
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आईसीडीएस ग्रोथ चार्ट के अनुसार कांगड़ा जिले में अप्रैल माह तक पांच साल तक के 67,220 बच्चों में से 3694 में पोषक तत्वों की कमी है।
वहीं, जिले के धर्मशाला उपमंडल में सबसे अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। यहां कुल 4795 में से 765 बच्चे कुपोषित हैं। जिला कांगड़ा में कुल कुपोषित बच्चों में से 20.7 फीसदी बच्चे धर्मशाला उपमंडल में ही आते हैं। दरअसल, कुपोषण वह अवस्था है, जिसमें पौष्टिक पदार्थ और भोजन, अव्यवस्थित रूप से ग्रहण करने के कारण शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। यूनिसेफ के अनुसार नाटापन, निर्बलता और कम वजन कुपोषण के तीन प्रमुख लक्षण हैं। अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का कहना है कि जन्म के बाद बच्चों को जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, उन्हें वे नहीं मिल पाते हैं। भारत में तो स्थिति यह है कि बच्चों का न तो सही ढंग से टीकाकरण हो पाता है और न ही उन्हें उचित इलाज मिल पाता है। ऐसी स्थिति में कुपोषण जैसी समस्याएं और अधिक गंभीर हो जाती हैं।
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कुपोषण का प्रभाव
शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण वह आसानी से किसी भी बीमारी का शिकार हो सकता है। आंकड़े बताते हैं कि छोटी उम्र के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण कुपोषण ही होता है। कुपोषण का सबसे गंभीर प्रभाव मानव उत्पादकता पर देखने को मिलता है और इसके प्रभाव से मानव उत्पादकता लगभग 10-15 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
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कुपोषण के कारण
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है। इनमें से अधिकांश लोग पर्याप्त भोजन प्राप्त करने में समर्थ नहीं हैं। इसके अलावा देश में पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण आहार के संबंध में जागरूकता की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। इस कारण तकरीबन पूरा परिवार कुपोषण का शिकार हो जाता है। वहीं, इस प्रकार देश में स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता भी कुपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
उपमंडल वार बच्चों में कुपोषण की स्थिति
उपमंडल- कुल बच्चे- कुपोषित बच्चे
बैजनाथ -1702 - 49
भवारना - 5575 - 248
देहरा - 5454 - 328
धर्मशाला - 4795 - 765
फतेहपुर - 6884 - 151
इंदौरा - 8857 - 738
कांगड़ा - 947 - 113
लंबागांव - 3645 - 210
नगरोटा बगवां - 3795 - 330
नगरोटा सूरियां - 3851 - 163
नूरपुर - 7658 - 160
पंचरुखी - 2593 - 50
रैत - 2545 - 59
सुलह - 1703 - 74
परागपुर - 7216 - 256
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कुल - 67220 - 3694
------------
आज से मनाया जाएगा पोषण माह
समाज को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से देश भर में पहली से 30 सितंबर तक पोषण माह मनाया जाएगा। इसमें कुपोषण से निपटने के लिए विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए चार हफ्तों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता का कार्य किया जाएगा।

-----------कोट्स-------------
जागरूकता से बचा जा सकता है कुपोषण से : अखिल
बच्चों में कुपोषण का सबसे बड़ा कारण अभिभावकों में जागरूकता की कमी है। अधिकतर लोगों को पता नहीं होता कि किस सीजन में कौन सी चीजें खाने में शामिल की जानी चाहिए। इसी कारण लोगों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। कुपोषण की स्थिति से निपटने के लिए पोषण अभियान के तहत काफी प्रयास किए जा रहे हैं। समाज को इस अभियान से जुड़कर कुपोषण से निपटने में सरकार का सहयोग करना चाहिए। - अखिल वर्मा, जिला समन्वयक, पोषण अभियान, जिला कांगड़ा
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