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कई कर्मचारियों को होना पड़ा राजनीति का शिकार : संघ
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:50 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर (कांगड़ा)। अपने हकों को लेकर अध्यापक संघ ने एक बार फिर से रोष जताया है। संघ का कहना है कि एक ही प्रदेश में रहने वाले एक ही पॉलिसी के तहत लगे हुए हजारों कर्मचारियों को राजनीति के चलते अपने ही हकों से महरूम करना एक लोकतांत्रिक प्रणाली में बहुत बड़ा अन्याय है। एक ही प्रदेश में कार्यरत कर्मचारी जो कि एक जैसे आरएडंपी रूल्स के तहत लगे। लेकिन, तीन साल की पॉलिसी होते हुए भी उनका करीब सात साल तक शोषण करने
के बाद नियमित किया। संघ के प्रधान प्रदेश उपाध्यक्ष छामछु सुब्बा, पंचरुखी के प्रधान प्रवीण कुमार, पालमपुर ब्लॉक प्रधान ओंकार चंद, भवारना ब्लॉक प्रधान दिनेश कुमार, फतेहपुर ब्लॉक प्रधान राकेश गौतम, पंचरुखी ब्लॉक महासचिव अजय कलोत्रा, उपप्रधान पुनीत शास्त्री, प्रेस सचिव गौरव सूद, बलदेव सिंह, शेलेंद्र सूद, अनिल कुमार, दिनेश पठानिया, बिंदु राणा, अजय अवस्थी और अरविंद शर्मा आदि ने दावा किया है कि ये वही कर्मचारी हैं, जिन्हें 2008 और 2009 में नए आरएंडपी नियमों के तहत भाजपा सरकार में नियुक्त हुए थे। इन्हें छह साल बाद नियमित करना था, लेकिन भेदभाव की नीति के चलते उस समय की कांग्रेस की सरकार ने इन कर्मचारियों को छह साल बीतने के बाद भी नियमित नहीं किया, जबकि संघ के आग्रह पर सात साल बाद नियमित किया गया। संघ का कहना है कि अनुबंध प्रथा के कार्यकाल को कम करना सरकार का एक सराहनीय कार्य है, लेकिन सिर्फ अपने समय में ही भर्ती हुए लोगों के लिए अनुबंध समय को कम करना एक भेदभाव की नीति को बढ़ावा देना है।
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पालमपुर (कांगड़ा)। अपने हकों को लेकर अध्यापक संघ ने एक बार फिर से रोष जताया है। संघ का कहना है कि एक ही प्रदेश में रहने वाले एक ही पॉलिसी के तहत लगे हुए हजारों कर्मचारियों को राजनीति के चलते अपने ही हकों से महरूम करना एक लोकतांत्रिक प्रणाली में बहुत बड़ा अन्याय है। एक ही प्रदेश में कार्यरत कर्मचारी जो कि एक जैसे आरएडंपी रूल्स के तहत लगे। लेकिन, तीन साल की पॉलिसी होते हुए भी उनका करीब सात साल तक शोषण करने
के बाद नियमित किया। संघ के प्रधान प्रदेश उपाध्यक्ष छामछु सुब्बा, पंचरुखी के प्रधान प्रवीण कुमार, पालमपुर ब्लॉक प्रधान ओंकार चंद, भवारना ब्लॉक प्रधान दिनेश कुमार, फतेहपुर ब्लॉक प्रधान राकेश गौतम, पंचरुखी ब्लॉक महासचिव अजय कलोत्रा, उपप्रधान पुनीत शास्त्री, प्रेस सचिव गौरव सूद, बलदेव सिंह, शेलेंद्र सूद, अनिल कुमार, दिनेश पठानिया, बिंदु राणा, अजय अवस्थी और अरविंद शर्मा आदि ने दावा किया है कि ये वही कर्मचारी हैं, जिन्हें 2008 और 2009 में नए आरएंडपी नियमों के तहत भाजपा सरकार में नियुक्त हुए थे। इन्हें छह साल बाद नियमित करना था, लेकिन भेदभाव की नीति के चलते उस समय की कांग्रेस की सरकार ने इन कर्मचारियों को छह साल बीतने के बाद भी नियमित नहीं किया, जबकि संघ के आग्रह पर सात साल बाद नियमित किया गया। संघ का कहना है कि अनुबंध प्रथा के कार्यकाल को कम करना सरकार का एक सराहनीय कार्य है, लेकिन सिर्फ अपने समय में ही भर्ती हुए लोगों के लिए अनुबंध समय को कम करना एक भेदभाव की नीति को बढ़ावा देना है।
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