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कांगड़ा को सीएम पद के दर्द से उबारने की कोशिश
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:54 PM IST
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सुनील चड्ढा
धर्मशाला। 68 में एक चौथाई 11 सीटें जीतने वाले सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को मंत्रिमंडल के गठन में सीएम पद न मिलने के दर्द से उबारने की कोशिश दिखी। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए कांगड़ा जिले को चार मंत्री पदों से नवाजा गया। इसमें नए जोश और अनुभव का सियासी मिश्रण किया गया। मंत्रिमंडल में दो पुराने अनुभवी नेताओं किशन कपूर और सरवीण चौधरी को ओहदा देते हुए विपिन परमार और बिक्रम ठाकुर को पहली बार मंत्री पद देकर नए चेहरों के रूप में उतारा गया।
तीन पद देकर कांगड़ा संसदीय क्षेत्र को पाटते हुए धर्मशाला से किशन कपूर, शाहपुर से सरवीण चौधरी और सुलह से विपिन परमार को मंत्री बनाया गया, जबकि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में आने वाले जसवां परागपुर से मंत्री बनाकर लोकसभा चुनाव 2019 को टारगेट किया गया। मंत्रिमंडल में कांगड़ा जिले में करीब 28 फीसदी राजपूत वोट बैंक को साधते हुए विपिन परमार और बिक्रम ठाकुर के रूप में दो मंत्री दिए गए। किशन कपूर को मंत्री बनाकर कांगड़ा जिला में करीब 11 फीसदी गद्दी वोट बैंक को साधा गया। करीब 50 फीसदी ओबीसी वोट बैंक को साधते हुए महिला कोटा पूरा कर सरवीण चौधरी को भी बड़ा ओहदा मिल गया।
भाजपा के संगठनात्मक चार जिलों की बात करें तो नूरपुर को छोड़कर तीनों पालमपुर, देहरा और कांगड़ा को साधने में भाजपा कामयाब रही। तीनों जिलों से एक-एक मंत्री पद जनता को मिला। मंत्री पद से महरूम रहे तीन सीटें दिलाने वाले नूरपुर जिला को भविष्य में सरकार में बड़ा पद मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि आगे राकेश पठानिया को सरकार में कोई बड़ा पद देकर नूरपुर की भरपाई की जा सकती है।
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राकेश पठानिया और धवाला का पत्ता कटा
मंत्रिमंडल में कांगड़ा जिले से मंत्री पद की रेस में चल रहे नूरपुर के राकेश पठानिया और ज्वालाजी से रमेश धवाला का आखिरी समय में नाम कट गया। मुख्यमंत्री पद की रेस में रहे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की कांगड़ा जिला में शक्ति प्रदर्शन के साथ सियासी एंट्री करवाने वाले राकेश पठानिया को मंत्री पद मिलने की पूरी आस थी। चुनाव परिणाम आने के बाद राकेश पठानिया दो दिन तक दिल्ली में भी रहे थे। वहीं, शांता के खास माने जाने वाले रमेश धवाला को इस बार मंत्री पद से महरूम रहना पड़ा। पिछली भाजपा सरकार में रमेश धवाला मंत्री थे। बताया जा रहा है कि चुनाव में देहरा से रविंद्र रवि को कथित सहयोग न करने के चलते धवाला का पत्ता मंत्रिमंडल से कटा।
मंत्रिमंडल में शांता और धूमल गुट दोनों को तवज्जो
कांगड़ा जिला को सियासी रेवड़ियां बांटने में शांता कुमार और धूमल गुट दोनों की चली। सुलह से शांता कुमार के खास माने जाने वाले विपिन परमार और किशन कपूर को मंत्रिमंडल में जगह मिली। वहीं, शाहपुर से सरवीण चौधरी और जसवां प्रागपुर से बिक्रम ठाकुर को मंत्री बनाकर धूमल खेमा साधा गया।
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धर्मशाला। 68 में एक चौथाई 11 सीटें जीतने वाले सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को मंत्रिमंडल के गठन में सीएम पद न मिलने के दर्द से उबारने की कोशिश दिखी। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए कांगड़ा जिले को चार मंत्री पदों से नवाजा गया। इसमें नए जोश और अनुभव का सियासी मिश्रण किया गया। मंत्रिमंडल में दो पुराने अनुभवी नेताओं किशन कपूर और सरवीण चौधरी को ओहदा देते हुए विपिन परमार और बिक्रम ठाकुर को पहली बार मंत्री पद देकर नए चेहरों के रूप में उतारा गया।
तीन पद देकर कांगड़ा संसदीय क्षेत्र को पाटते हुए धर्मशाला से किशन कपूर, शाहपुर से सरवीण चौधरी और सुलह से विपिन परमार को मंत्री बनाया गया, जबकि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में आने वाले जसवां परागपुर से मंत्री बनाकर लोकसभा चुनाव 2019 को टारगेट किया गया। मंत्रिमंडल में कांगड़ा जिले में करीब 28 फीसदी राजपूत वोट बैंक को साधते हुए विपिन परमार और बिक्रम ठाकुर के रूप में दो मंत्री दिए गए। किशन कपूर को मंत्री बनाकर कांगड़ा जिला में करीब 11 फीसदी गद्दी वोट बैंक को साधा गया। करीब 50 फीसदी ओबीसी वोट बैंक को साधते हुए महिला कोटा पूरा कर सरवीण चौधरी को भी बड़ा ओहदा मिल गया।
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भाजपा के संगठनात्मक चार जिलों की बात करें तो नूरपुर को छोड़कर तीनों पालमपुर, देहरा और कांगड़ा को साधने में भाजपा कामयाब रही। तीनों जिलों से एक-एक मंत्री पद जनता को मिला। मंत्री पद से महरूम रहे तीन सीटें दिलाने वाले नूरपुर जिला को भविष्य में सरकार में बड़ा पद मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि आगे राकेश पठानिया को सरकार में कोई बड़ा पद देकर नूरपुर की भरपाई की जा सकती है।
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राकेश पठानिया और धवाला का पत्ता कटा
मंत्रिमंडल में कांगड़ा जिले से मंत्री पद की रेस में चल रहे नूरपुर के राकेश पठानिया और ज्वालाजी से रमेश धवाला का आखिरी समय में नाम कट गया। मुख्यमंत्री पद की रेस में रहे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की कांगड़ा जिला में शक्ति प्रदर्शन के साथ सियासी एंट्री करवाने वाले राकेश पठानिया को मंत्री पद मिलने की पूरी आस थी। चुनाव परिणाम आने के बाद राकेश पठानिया दो दिन तक दिल्ली में भी रहे थे। वहीं, शांता के खास माने जाने वाले रमेश धवाला को इस बार मंत्री पद से महरूम रहना पड़ा। पिछली भाजपा सरकार में रमेश धवाला मंत्री थे। बताया जा रहा है कि चुनाव में देहरा से रविंद्र रवि को कथित सहयोग न करने के चलते धवाला का पत्ता मंत्रिमंडल से कटा।
मंत्रिमंडल में शांता और धूमल गुट दोनों को तवज्जो
कांगड़ा जिला को सियासी रेवड़ियां बांटने में शांता कुमार और धूमल गुट दोनों की चली। सुलह से शांता कुमार के खास माने जाने वाले विपिन परमार और किशन कपूर को मंत्रिमंडल में जगह मिली। वहीं, शाहपुर से सरवीण चौधरी और जसवां प्रागपुर से बिक्रम ठाकुर को मंत्री बनाकर धूमल खेमा साधा गया।