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न ग्रीन टैक्स, न शराब पर सेस, न घर-घर से उठा कूड़ा
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न ग्रीन टैक्स लगा, न शराब पर सेस
आमसभा में प्रस्ताव लाने तक सीमित रहा नगर निगम, घर-घर से कूड़ा भी नहीं उठा
किसी भी बड़े प्रस्ताव पर नहीं हुआ काम, शहर की सफाई पर हर बार होता रहा शोर शराबा
हरीश चंद्र
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला का वर्ष 2018 आमसभा में नए प्रस्ताव लाने में ही निकल गया। न प्रस्तावों को न प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली, न ही एमसी अपने स्तर पर कोई बड़ा काम शहर में शुरू कर पाया। इस साल के शुरू में एमसी ने बाहरी राज्यों के वाहनों के धर्मशाला शहर में प्रवेश करने के लिए ग्रीन टैक्स वसूलने, एमसी के दायरे में आने वाले शराब ठेकों से प्रति बोतल सेस वसूलने के प्रस्ताव आमसभा में लाए। इन्हें प्रदेश सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन धरातल में कुछ नहीं हो पाया। इसके अलावा घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना पर पूरे साल योजना बनती रही, जो सिर्फ आमसभा से आगे नहीं बढ़ पाई। हर आमसभा में पार्षद सफाई व्यवस्था का रोना पीटते रहे।
नए महापौर-उपमहापौर के चुनाव की रही चर्चा
नगर निगम धर्मशाला के वर्तमान महापौर देवेंद्र जग्गी और उपमहापौर ओंकार नैहरिया का चुनाव भी खूब चर्चा में रहा। इस कारण तीन महीने एमसी का हाउस नहीं हो पाए।
इनसेट
फाइलों में सिमटी नई डंपिंग साइट
नगर निगम धर्मशाला की नई डंपिंग साइट भी फाइलों में सिमटी रही। पंचायत का एनओसी न मिलने के कारण प्रशासन न एमसी के हाथ खड़े रहे। सुधेड़ के लोगों ने वर्तमान डंपिंग साइट को बदलने की मांग कर लेकर तीन-चार बार प्रदर्शन भी किया।
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वेंडिगं जोन और पार्किंग विकसित करने पर सिर्फ योजना
रेहड़ी-फड़ी धारकों के लिए भी वेंडिंग जोन विकसित करने पर चर्चा होती रही। इसके अलावा नई पार्किंग विकसित करने पर भी योजनाएं ही बनंी।
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आमसभा में प्रस्ताव लाने तक सीमित रहा नगर निगम, घर-घर से कूड़ा भी नहीं उठा
किसी भी बड़े प्रस्ताव पर नहीं हुआ काम, शहर की सफाई पर हर बार होता रहा शोर शराबा
हरीश चंद्र
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला का वर्ष 2018 आमसभा में नए प्रस्ताव लाने में ही निकल गया। न प्रस्तावों को न प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली, न ही एमसी अपने स्तर पर कोई बड़ा काम शहर में शुरू कर पाया। इस साल के शुरू में एमसी ने बाहरी राज्यों के वाहनों के धर्मशाला शहर में प्रवेश करने के लिए ग्रीन टैक्स वसूलने, एमसी के दायरे में आने वाले शराब ठेकों से प्रति बोतल सेस वसूलने के प्रस्ताव आमसभा में लाए। इन्हें प्रदेश सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन धरातल में कुछ नहीं हो पाया। इसके अलावा घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना पर पूरे साल योजना बनती रही, जो सिर्फ आमसभा से आगे नहीं बढ़ पाई। हर आमसभा में पार्षद सफाई व्यवस्था का रोना पीटते रहे।
नए महापौर-उपमहापौर के चुनाव की रही चर्चा
नगर निगम धर्मशाला के वर्तमान महापौर देवेंद्र जग्गी और उपमहापौर ओंकार नैहरिया का चुनाव भी खूब चर्चा में रहा। इस कारण तीन महीने एमसी का हाउस नहीं हो पाए।
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फाइलों में सिमटी नई डंपिंग साइट
नगर निगम धर्मशाला की नई डंपिंग साइट भी फाइलों में सिमटी रही। पंचायत का एनओसी न मिलने के कारण प्रशासन न एमसी के हाथ खड़े रहे। सुधेड़ के लोगों ने वर्तमान डंपिंग साइट को बदलने की मांग कर लेकर तीन-चार बार प्रदर्शन भी किया।
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वेंडिगं जोन और पार्किंग विकसित करने पर सिर्फ योजना
रेहड़ी-फड़ी धारकों के लिए भी वेंडिंग जोन विकसित करने पर चर्चा होती रही। इसके अलावा नई पार्किंग विकसित करने पर भी योजनाएं ही बनंी।