{"_id":"59f4cd714f1c1b71548b9827","slug":"131509215601-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जल्द बदलेंगे नूरपुर सिल्क मिल के दिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जल्द बदलेंगे नूरपुर सिल्क मिल के दिन
Updated Sun, 29 Oct 2017 12:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। उत्तरी भारत की सरकारी क्षेत्र में एकमात्र नूरपुर सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के सरकारी प्रयास तेज हो गए हैं। इस कड़ी में शनिवार को हिमाचल प्रदेश जनरल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन (एचपीजीआईसी) के महाप्रबंधक कैप्टन जेएम पठानिया ने नूरपुर सिल्क मिल का दौरा किया और लंबे समय से घाटे में चल रही सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों और प्रयासों को लेकर लंबी मंत्रणा की गई।
बैठक के दौरान मिल को रिवाइव करने के लिए कुछेक मुख्य बिंदुओं को लेकर एक्शन प्लान भी बनाया गया, ताकि इस मिल में बनने वाले सिल्क के कपड़ों खासकर सिल्क साड़ी के लिए मशहूर नूरपुर सिल्क मिल की धाक को दोबारा कायम किया जा सके। अमर उजाला से विशेष बातचीत में एचपीजीआईसी के महाप्रबंधक जेएम पठानिया ने कहा कि नूरपुर सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष रूप से पांच बिंदुओं को लेकर एक एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके तहत मिल को दोबारा उबारने के लिए मशीनरी को अपग्रेड करने के साथ-साथ बिल्डिंग की रिपेयर इत्यादि पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही लंबे समय से नूरपुर मिल में कपड़ा तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले जो पांच पावर लूम बंद पड़े थे, उन्हें अपग्रेड करवाया जा रहा है और अगले एक सप्ताह के भीतर तीन पावर लूम को चालू भी कर दिया जाएगा, जबकि शेष दो पावर लूम भी एक माह के भीतर चालू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि नूरपुर मिल की 12 हजार मीटर कपड़ा बनाने की क्षमता को देखते हुए जरूरी ढांचागत बदलावों और जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा। क्योंकि, मिल बंद पड़े होने के दौरान अब तक सिर्फ पुराने स्टाक को ही डिजाइन कर बेचा जा रहा था, लेकिन पावर लूम चालू होते ही उत्पादन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा। इसके अलावा बाजार में प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने और बदलते दौर के साथ ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए नए डिजाइन भी आउटसोर्स किए जाएंगे। इसके लिए एचपीजीआईसी निफ्ड के अलावा दूसरे प्रोफेशन लोगों की भी सेवाएं ली जाएंगी। जहां तक नूरपुर मिल में बनने वाले उत्पादों की मार्केटिंग का सवाल है तो इसके लिए मार्केटिंग नीति भी बनाई जाएगी, ताकि इसके उत्पाद फिर से बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिक सके।
विज्ञापन
नूरपुर (कांगड़ा)। उत्तरी भारत की सरकारी क्षेत्र में एकमात्र नूरपुर सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के सरकारी प्रयास तेज हो गए हैं। इस कड़ी में शनिवार को हिमाचल प्रदेश जनरल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन (एचपीजीआईसी) के महाप्रबंधक कैप्टन जेएम पठानिया ने नूरपुर सिल्क मिल का दौरा किया और लंबे समय से घाटे में चल रही सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों और प्रयासों को लेकर लंबी मंत्रणा की गई।
बैठक के दौरान मिल को रिवाइव करने के लिए कुछेक मुख्य बिंदुओं को लेकर एक्शन प्लान भी बनाया गया, ताकि इस मिल में बनने वाले सिल्क के कपड़ों खासकर सिल्क साड़ी के लिए मशहूर नूरपुर सिल्क मिल की धाक को दोबारा कायम किया जा सके। अमर उजाला से विशेष बातचीत में एचपीजीआईसी के महाप्रबंधक जेएम पठानिया ने कहा कि नूरपुर सिल्क मिल को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष रूप से पांच बिंदुओं को लेकर एक एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके तहत मिल को दोबारा उबारने के लिए मशीनरी को अपग्रेड करने के साथ-साथ बिल्डिंग की रिपेयर इत्यादि पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही लंबे समय से नूरपुर मिल में कपड़ा तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले जो पांच पावर लूम बंद पड़े थे, उन्हें अपग्रेड करवाया जा रहा है और अगले एक सप्ताह के भीतर तीन पावर लूम को चालू भी कर दिया जाएगा, जबकि शेष दो पावर लूम भी एक माह के भीतर चालू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि नूरपुर मिल की 12 हजार मीटर कपड़ा बनाने की क्षमता को देखते हुए जरूरी ढांचागत बदलावों और जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा। क्योंकि, मिल बंद पड़े होने के दौरान अब तक सिर्फ पुराने स्टाक को ही डिजाइन कर बेचा जा रहा था, लेकिन पावर लूम चालू होते ही उत्पादन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा। इसके अलावा बाजार में प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने और बदलते दौर के साथ ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए नए डिजाइन भी आउटसोर्स किए जाएंगे। इसके लिए एचपीजीआईसी निफ्ड के अलावा दूसरे प्रोफेशन लोगों की भी सेवाएं ली जाएंगी। जहां तक नूरपुर मिल में बनने वाले उत्पादों की मार्केटिंग का सवाल है तो इसके लिए मार्केटिंग नीति भी बनाई जाएगी, ताकि इसके उत्पाद फिर से बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिक सके।
विज्ञापन