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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   10 days of penance, sacrifice, and restraint the unique spiritual practice of Gugga's devotees.

Kangra News: 10 दिन तप, त्याग और संयम... गुग्गा के भक्तों की अनूठी साधना

Wed, 02 Sep 2026 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 02 Sep 2026 11:55 PM IST
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10 days of penance, sacrifice, and restraint the unique spiritual practice of Gugga's devotees.
फोटो कैप्शन :-दूसरी फेरी के दौरान छत्र लेकर फेरी के लिए जाते बाबा जी के भक्त। संवाद
सुलह (कांगड़ा)। जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री गुग्गा छतरी मंदिर सलोह में रक्षाबंधन से शुरू हुआ 10 दिवसीय नवमी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, संयम और अगाध आस्था का प्रतीक बना हुआ है। इस मेले की मुख्य पहचान बाबा गुग्गा जाहरवीर के वे विशेष भक्त हैं जो पूरे 10 दिन तक कठोर नियमों का पालन करते हुए सच्ची भक्ति की मिसाल पेश करते हैं।
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मंदिर कमेटी और स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, रक्षाबंधन से नवमी तक चलने वाले इस व्रत के दौरान भक्त तीन प्रमुख नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। पूरे 10 दिन भक्त जूते-चप्पल नहीं पहनते। गर्म सड़क हो या कच्चा मार्ग, वे नंगे पांव ही बाबा की फेरी और सेवा में समर्पित रहते हैं। इस अवधि में भक्त बाल, दाढ़ी और मूंछ नहीं कटवाते, जिसे वैराग्य, सांसारिक विरक्ति और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और हर प्रकार के नशे से पूरी तरह दूरी रखी जाती है। कई भक्त दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण कर साधना करते हैं।
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क्यों की जाती है इतनी कठोर साधना
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग देवता के रूप में पूजे जाने वाले बाबा गुग्गा जाहरवीर नियम और संयम का पालन करने वाले भक्तों से विशेष प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इस कठिन तपस्या से घर में सुख-समृद्धि आती है। सर्पदोष से मुक्ति मिलती है और बाबा परिवार की हर विपदा से रक्षा करते हैं। सदियों पुरानी यह परंपरा आज के आधुनिक दौर में भी उसी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है। बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा युवाओं को संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि है।
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बारिश में भी नहीं डिगी आस्था, निकली दूसरी फेरी
बुधवार को श्री गुग्गा छतरी मंदिर सलोह से बाबा की दूसरी फेरी निकाली गई। सुबह सात बजे आरती के समापन के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश ने पवित्र छत्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर फेरी को रवाना किया। इस दौरान मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े और बाबा के विशेष भक्त (चेले) आस्था भाव में संगलों से खेलते नजर आए। छत्र के बाहर निकलते ही बारिश शुरू हो गई लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। यह दूसरी फेरी ठाकुरद्वारा, घडूं, दैहण, मनसिंबल और ठंबा आदि गांवों से होकर गुजरी।
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