Himachal: धार्मिक स्थलों में बढ़ते प्रदूषण से हिमालय का संतुलन खतरे में; कचरे, पेड़ कटान ने बढ़ाई चुनौतियां
हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते प्रदूषण से हिमालय की संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के टूरिज्म एंड ट्रैवल विभाग के पीएचडी शोधार्थी रवीश मृगेंद्र ने इस समस्या पर शोध किया है।
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हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते प्रदूषण से हिमालय की संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे, पेड़ों की कटाई और अव्यवस्थित निर्माण से स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के टूरिज्म एंड ट्रैवल विभाग के पीएचडी शोधार्थी रवीश मृगेंद्र ने इस समस्या पर शोध किया है। रवीश का कहना है कि धार्मिक पर्यटन स्थलों पर बढ़ता प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप ले रहा है। वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में कुल 1,81,24,694 पर्यटक पहुंचे, जिनमें से अधिकांश धार्मिक स्थलों पर गए।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 13.24 प्रतिशत अधिक है। धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल करने से पानी और शीतल पेय की खाली बोतलों, चिप्स रैपर, शराब की बोतलों का कचरा लगातार बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार किन्नौर के कासुराज महाराज ने किन्नौर कैलाश यात्रा रोकने का आदेश दिया। इसी तरह ब्रह्माणी माता, नगेला दमाहरी देवता और बिजली महादेव ने भी प्रदूषण और जंगल कटान पर नाराजगी व्यक्त की है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि धार्मिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की नीतियां तत्काल लागू नहीं की गईं तो हिमालय का प्राकृतिक संतुलन और धार्मिक विरासत दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। इससे लोगों के जीवन पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।
श्रीखंड महादेव, कमरुनाग जैसे स्थलों में कचरा बढ़ा
धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीखंड महादेव, कमरुनाग झील, पराशर झील, आदि हिमानी चामुंडा, चूड़धार, मणिमहेश, किन्नर कैलाश सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर बीते 10 वर्षों में प्रदूषण में भारी इजाफा हुआ है। स्थानीय देवता कई बार अपने गुरों के माध्यम से भी चेतावनी जारी कर चुके हैं।