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Himachal: धार्मिक स्थलों में बढ़ते प्रदूषण से हिमालय का संतुलन खतरे में; कचरे, पेड़ कटान ने बढ़ाई चुनौतियां

Sun, 30 Nov 2025 01:33 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 30 Nov 2025 01:33 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते प्रदूषण से हिमालय की संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के टूरिज्म एंड ट्रैवल विभाग के पीएचडी शोधार्थी रवीश मृगेंद्र ने इस समस्या पर शोध किया है।

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Increasing pollution at religious sites threatens the balance of the Himalayas
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते प्रदूषण से हिमालय की संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे, पेड़ों की कटाई और अव्यवस्थित निर्माण से स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के टूरिज्म एंड ट्रैवल विभाग के पीएचडी शोधार्थी रवीश मृगेंद्र ने इस समस्या पर शोध किया है। रवीश का कहना है कि धार्मिक पर्यटन स्थलों पर बढ़ता प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप ले रहा है। वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में कुल 1,81,24,694 पर्यटक पहुंचे, जिनमें से अधिकांश धार्मिक स्थलों पर गए।

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यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 13.24 प्रतिशत अधिक है। धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल करने से पानी और शीतल पेय की खाली बोतलों, चिप्स रैपर, शराब की बोतलों का कचरा लगातार बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार किन्नौर के कासुराज महाराज ने किन्नौर कैलाश यात्रा रोकने का आदेश दिया। इसी तरह ब्रह्माणी माता, नगेला दमाहरी देवता और बिजली महादेव ने भी प्रदूषण और जंगल कटान पर नाराजगी व्यक्त की है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि धार्मिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की नीतियां तत्काल लागू नहीं की गईं तो हिमालय का प्राकृतिक संतुलन और धार्मिक विरासत दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। इससे लोगों के जीवन पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

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हिमाचल के धार्मिक स्थलों का बतौर पर्यटन स्थल बढ़ता प्रयोग चिंतनीय है। साल दर साल हिमालयी क्षेत्रों के धार्मिक स्थलों पर प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है। हिमाचल आने वाले सैलानियों के धार्मिक स्थलों का रुख करने की संख्या हर साल बढ़ रही है। - रवीश मृगेन्द्र, शोधार्थी टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला

श्रीखंड महादेव, कमरुनाग  जैसे स्थलों में कचरा बढ़ा
धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीखंड महादेव, कमरुनाग झील, पराशर झील, आदि हिमानी चामुंडा, चूड़धार, मणिमहेश, किन्नर कैलाश सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर बीते 10 वर्षों में प्रदूषण में भारी इजाफा हुआ है। स्थानीय देवता कई बार अपने गुरों के माध्यम से भी चेतावनी जारी कर चुके हैं। 
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