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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP High Court Polytechnic teachers will not get four-level pay scale on the lines of Punjab petition rejected

HP High Court: पॉलिटेक्निक शिक्षकों को पंजाब की तर्ज पर चार स्तरीय वेतनमान नहीं, याचिका खारिज; जानें

Fri, 22 Aug 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 22 Aug 2025 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि हिमाचल सरकार पंजाब के वेतनमानों को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने कर्मचारियों के लिए स्वतंत्र रूप से वेतन तय कर सकती जानें पूरा मामला...

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HP High Court Polytechnic teachers will not get four-level pay scale on the lines of Punjab petition rejected
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी पॉलिटेक्निक शिक्षकों की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पंजाब के समान चार स्तरीय वेतनमान (फोर टायर पे स्केल) लागू करने की मांग की गई थी। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की अदालत ने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार पंजाब के वेतनमानों को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने कर्मचारियों के लिए स्वतंत्र रूप से वेतन तय कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा कि उन्हें पंजाब के समकक्षों के बराबर वेतनमान पानी का निहित अधिकार है, कानूनी रूप से सही नहीं है।

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पॉलिटेक्निक संघ ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की सिफारिशों के अनुसार वेतन दिया जाए या कम से कम पंजाब के समकक्षों के बराबर वेतनमान प्रदान किया जाए। साथ ही मांग की थी कि राज्य सरकार की ओर से 20 अगस्त 2013 को जारी किए गए उस निर्णय को रद्द किया जाए जिसमें उन्हें चार स्तरीय वेतनमान देने से इन्कार कर दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य सेवाओं जैसे कि वन सेवा को पंजाब तर्ज पर लाभ दिया गया है, लेकिन पॉलिटेक्निक शिक्षकों को इससे वंचित किया गया।

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राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भले ही वह पंजाब के वेतन पैटर्न पर विचार कर सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने को बाध्य नहीं है। वेतन निर्धारण करते समय वह अपने वित्तीय संसाधनों, भौगोलिक परिस्थितियों और सेवा नियमों को ध्यान में रखती है। चार स्तरीय वेतनमान का मामला मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया था। विचार विमर्श करने के बाद पाया गया कि चार स्तरीय वेतनमान लागू करने से न केवल वित्तीय बोझ बढ़ेगा बल्कि पदानुक्रम में असंतुलन आएगा, क्योंकि इससे नौ साल की सेवा के बाद शिक्षक उपायुक्त से अधिक वेतन पाने लगेंगे।

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