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Toilet Seat Tax: 'हिमाचल में टॉयलेट सीट पर टैक्स नहीं', जल शक्ति विभाग ने दी सफाई, नहीं जारी हुई कोई अधिसूचना
Fri, 04 Oct 2024 03:00 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 04 Oct 2024 03:00 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में टॉयलेट सीट की संख्या के आधार पर सीवरेज टैक्स लगाए जाने के संबंध में मीडिया रिपोर्टस का जल शक्ति विभाग ने खंडन किया है। जल शक्ति विभाग ने प्रेस नोट जारी किया है।
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जलशक्ति विभाग
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश जल शक्ति विभाग ने मीडिया में प्रकाशित उस खबर का खंडन किया है जिसमें यह कहा गया है कि भवन मालिक की ओर से स्थापित सीटों की संख्या के आधार पर सीवरेज कनेक्शन दिए जाएंगे। स्पष्ट किया जाता है कि ऐसी कोई अधिसूचना वर्तमान सरकार द्वारा जारी नहीं की गई है।
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#WATCH शिमला: हिमाचल प्रदेश में भवन मालिकों द्वारा लगाई गई सीटों(शौचालय) की संख्या के आधार पर सीवरेज कनेक्शन दिए जाने के संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स पर राज्य के जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने कहा, "ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शुल्कों को लेकर 21 सितंबर… pic.twitter.com/wj2jOnxUqF
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 4, 2024
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सीवरेज कनेक्शन पूर्व की भांति ही प्रदान किए जाते रहेंगे। हमारा लक्ष्य 100 प्रतिशत कनेक्टिविटी प्राप्त करना है, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके और सीवरेज के उचित उपचार को सुनिश्चित किया जा सके। हाल ही में केवल पानी के शुल्क के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है, जबकि अन्य सभी चीजें यथावत रहेंगी।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल शक्ति विभाग) ने दी सफाई
वहीं, राज्य के जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने कहा, "ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शुल्कों को लेकर 21 सितंबर 2024 को अधिसूचना जारी की गई थी। इस पर विस्तार से सब कुछ बताया गया था। जहां भी विभाग द्वारा सीवरेज लगाया गया है, वहां पानी के बिल का 30% सीवरेज शुल्क लिया जाएगा। लेकिन कुछ प्रतिष्ठान ऐसे थे जहां उनकी अपनी जल प्रणाली थी, लेकिन वे विभाग के सीवरेज का इस्तेमाल करते थे इसलिए शौचालय सीटों की संख्या के आधार पर सीवरेज शुल्क लगाने का फैसला किया गया था लेकिन जैसे ही यह अधिसूचना जारी हुई और फाइल उपमुख्यमंत्री के पास पहुंची, उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं लगता। इसलिए इसे वापस ले लिया गया। प्रति सीट(शौचालय सीट) का यह प्रावधान वापस ले लिया गया है।"