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हिमाचल प्रदेश: प्राकृतिक खेती से जुड़ेंगे सैंकड़ों गांव, प्रशिक्षण के साथ खाद और छिड़काव के लिए मिलेगा अनुदान

Thu, 24 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 24 Jul 2025 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के सैंकड़ों गांव प्राकृतिक खेती से जुड़ेंगे। प्रदेश में 21,750 हेक्टेयर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत लिया गया है। खास बात यह है कि अब प्राकृतिक खेती टुकड़ों में नहीं, बल्कि क्लस्टर में होगी। पढ़ें विस्तार से...

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Himachal Hundreds of villages will be connected with natural farming training subsidy know all
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अब क्लस्टर के तहत सैंकड़ों गांवों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि प्रदेश में अब प्राकृतिक खेती के साथ 61,998 किसान परिवारों को प्रशिक्षित करने के साथ ही हर फसल के सीजन में तय अनुदान राशि भी प्रदान की जाएगी।

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प्रदेश में 21,750 हेक्टेयर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत लिया गया है। खास बात यह है कि अब प्राकृतिक खेती टुकड़ों में नहीं, बल्कि क्लस्टर में होगी। 435 क्लस्टर प्रदेश में विकसित किए गए हैं। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) परियोजना के जरिये इस योजना को लागू किया जा रहा है। किसानों को प्रति हेक्टेयर दो-दो हजार की अनुदान राशि खरीफ और रबी सीजन में दी जाएगी।

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किसानों को देसी खाद और फसलों पर छिड़काव की सामग्री बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए बकायदा एक क्लस्टर में दो-दो क्लोज रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) तैनात किए जाएंगे। इन मासिक पांच हजार रुपये भत्ता दिया जाएगा। प्रदेशभर में 870 सीआरपी की नियुक्ति कर दी गई है। इस योजना के तहत बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) सेंटर क्लस्टर के समीप बनाया जाएगा।

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इस बीआरसी में किसान के पास देसी गाय की अनिवार्यता रहेगी। यहां पर देसी खाद और प्राकृतिक खेती के लिए प्रयोग होने वाले उत्पादों को तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इस बीआरसी को एक लाख रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी। यहां पर तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री किसान की ओर से की जाएगी और सस्ती दरों पर अन्य किसानों को खाद और फसल के जरूरी प्राकृतिक छिड़काव सामग्री मिल सकेगी।

हर क्लस्टर में 50 हेक्टेयर भूमि, खरीफ की मिलेगी पहली किस्त
हर क्लस्टर में 50 हेक्टेयर भूमि के एरिया को लिया गया है। हर क्लस्टर में कम से कम 125 किसान परिवारों को जोड़ा गया है। यह किसान सीआरपी की मदद से प्राकृतिक खेती करेंगे और देसी खाद का उत्पादन भी घर पर कर सकेंगे। हर सीजन में प्रति हेक्टेयर किसानों को 2000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इस बार खरीफ सीजन में अनुदान की पहली किस्त अगस्त तक किसानों को दी जा सकती है।
 

इसलिए बनाए गए क्लस्टर
प्रदेश में सैकड़ों हेक्टेयर में किसान अपने स्तर पर प्राकृतिक खेती को कर रहे हैं। आत्मा परियोजना के तहत वर्ष 2018 से हजारों किसान प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन यह किसानों टुकड़ों में खेती कर रहे थे। गांव में एक अथवा दो किसान इस खेती को अपना रहे थे, लेकिन गांव के बाकी क्षेत्र में रासायनिक खादों के प्रयोग से इन किसानों की खेती भी प्रभावित हो रही थी और उचित परिणाम नहीं मिल रहे थे। अब क्लस्टर विकसित किए हैं, ताकि पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती के परिणाम मिल सके।
 

इस योजना के तहत पंजीकृत किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस योजना के तहत बाद में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रमाणपत्र भी वितरित होंगे। प्रशिक्षण और अनुदान का प्रावधान योजना के तहत है। -अतुल डोगरा, संयुक्त निदेशक आत्मा परियोजना
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