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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court Ruling: Retirement dues cannot be withheld on the pretext of a lack of funds.

हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: पैसों की कमी का बहाना बनाकर सेवानिवृत्ति बकाया नहीं रोक सकते

Thu, 08 Oct 2026 08:05 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 08 Oct 2026 08:05 PM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पैसों की कमी का बहाना बनाकर कर्मचारियों के सेवानिवृत्त बकाया नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि सेवानिवृत्ति लाभ खैरात नहीं, अधिकार है। 

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Himachal High Court Ruling: Retirement dues cannot be withheld on the pretext of a lack of funds.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पैसों की कमी का बहाना बनाकर कर्मचारियों के सेवानिवृत्त बकाया नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि सेवानिवृत्ति लाभ खैरात नहीं, अधिकार है। अदालत ने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता 26 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 4 हफ्तों के भीतर 4 नवंबर तक उनकी लीव एनकैशमेंट का भुगतान करे। ऐसा न करने पर विश्वविद्यालय को वास्तविक देय तिथि से 5 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने यह फैसला डॉ. कमल शर्मा और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर 26 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

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पेंशन या रिटायरमेंट के लाभ कोई खैरात या इनाम नहीं: कोर्ट
सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में माना था कि उसने मई 2024 के बाद से रिटायर हुए कर्मचारियों को लीव एनकैशमेंट नहीं दी है। विश्वविद्यालय का कहना था कि सरकारी मदद कम मिलने और आर्थिक तंगी के कारण वह भुगतान नहीं कर पा रही है। कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन या रिटायरमेंट के लाभ कोई खैरात या इनाम नहीं हैं, बल्कि यह कर्मचारियों का कानूनी हक है। अदालत ने टिप्पणी की कि सेवानिवृत्ति के बाद समय पर वित्तीय लाभ मिलना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सम्मान से जीने के अधिकार का हिस्सा है। यूनिवर्सिटी को पहले से पता था कि कर्मचारी कब रिटायर हो रहे हैं, इसलिए फंड का इंतजाम समय पर करना उनकी जिम्मेदारी थी।

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