फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court: Equal pay for equal work is a constitutional goal; the court cannot remain a mute spectat

हिमाचल हाईकोर्ट के बड़े फैसले: समान काम के लिए समान वेतन एक सांविधानिक लक्ष्य, अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती

Tue, 29 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 29 Sep 2026 05:00 AM IST
सार

न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के तहत एक सांविधानिक लक्ष्य है। सरकार की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि वेतनमान तय करना सिर्फ कार्यपालिका का काम है। जानिए कोर्ट के बड़े फैसले...

विज्ञापन
Himachal High Court: Equal pay for equal work is a constitutional goal; the court cannot remain a mute spectat
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि दो अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, काम का स्वरूप और जिम्मेदारियां एक जैसी हैं तो केवल विभाग अलग होने के आधार पर उन्हें कम वेतन नहीं दिया जा सकता। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के तहत एक सांविधानिक लक्ष्य है। सरकार की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि वेतनमान तय करना सिर्फ कार्यपालिका का काम है। कोर्ट ने कहा कि जब अलग-अलग विभागों में समान योग्यता और काम के बावजूद कर्मचारियों के साथ तर्कहीन या भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है तो अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती और उसे दखल देने का पूरा अधिकार है।

विज्ञापन


याचिकाकर्ता विजय रानी गुप्ता को वर्ष 1991 में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से कृषि विभाग में आर्ट/क्राफ्ट टीचर के पद पर 950-1800 के वेतनमान में नियुक्त किया गया था। वहीं दूसरी ओर समान शैक्षणिक योग्यता और उसी चयन प्रक्रिया के तहत ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत जूनियर टेलरिंग मिस्ट्रेस को 1350-2400 का उच्च वेतनमान दिया जा रहा था। वेतन में इस विसंगति को दूर करने के लिए याचिकाकर्ता ने जब सरकार के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तो इसे खारिज कर दिया। सरकार की दलील थी कि याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के समय ही इस वेतनमान को स्वीकार किया था और उच्च वेतनमान देना पंजाब पैटर्न के नियमों के खिलाफ होगा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन


 

आय प्रमाणपत्र में परिवार की हर स्रोत से आय दिखाना जरूरी : हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आय प्रमाणपत्र जारी करते समय परिवार की सभी स्रोतों से अर्जित आय को शामिल करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि चाहे आय मौसमी रोजगार या मस्टर रोल से ही क्यों न हुई हो, उसे आय प्रमाणपत्र में दर्शाया जाना आवश्यक है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने यह फैसला याचिकाकर्ता कुसुम लता की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आय प्रमाणपत्र का मुख्य उद्देश्य किसी परिवार की वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक रूप में लाना है। आय का स्रोत चाहे दिहाड़ी मजदूरी हो या मौसमी काम, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि एसडीओ सिविल के आदेश को सही माना जाता, तो इससे उन परिवारों के साथ भेदभाव होता जिनकी कोई आय नहीं है। उल्लेखनीय है कि घुमारवीं में आंगनबाड़ी केंद्र कोठी-2 में वर्ष 2007 में प्रतिवादी का चयन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर हुआ था। याचिकाकर्ता ने उसके आय प्रमाणपत्र को चुनौती दी। तहसीलदार घुमारवीं की ओर से कराई गई जांच में सामने आया कि प्रतिवादी चयनित उम्मीदवार के पिता ने ब्लॉक घुमारवीं में राजमिस्त्री के रूप में काम करके वर्ष 2006-2007 में 18,000 रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की थी। चूंकि तत्कालीन आंगनबाड़ी नीति के अनुसार पात्रता के लिए अधिकतम वार्षिक आय सीमा 12,000 रुपये निर्धारित थी, इसलिए तहसीलदार ने 30 अगस्त 2011 को चयनित उम्मीदवार का आय प्रमाणपत्र रद्द कर दिया था। हालांकि, अपीलीय अधिकारी (एसडीओ सिविल) ने 26 जून 2013 के अपने आदेश से तहसीलदार के फैसले को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि मौसमी कार्य से हुई आय को बीपीएल नियमों के तहत कुल आय में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने उपमंडल अधिकारी की ओर से 26 जून 2013 को पारित आदेश को कानून की नज़र में अमान्य करार देते हुए पूरी तरह से निरस्त कर दिया। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले से संबंधित नियमानुसार आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।

विज्ञापन

संपत्ति का उपयोग कैसे करना है, यह तय करना मकान मालिक का अधिकार
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के प्रसिद्ध लोअर बाजार स्थित दुकान को खाली कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता का आकलन केवल याचिका दायर करने की तारीख से ही किया जाना चाहिए, न कि मामले के अंतिम निपटारे की तारीख से। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने तल्ख लहजे में कहा कि अपनी संपत्ति का उपयोग कैसे करना है, यह तय करने का अधिकार सिर्फ मकान मालिक का है। किरायेदार मकान मालिक को यह निर्देश नहीं दे सकता कि वह अपनी संपत्ति का उपयोग किस तरह करे। अदालत ने शिमला के लोअर बाजार स्थित ग्राउंड फ्लोर की दुकान से जुड़े मामले में किरायेदार की ओर से दायर पुनर्विचार (समीक्षा) याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रेंट कंट्रोलर शिमला और अपीलीय प्राधिकारी शिमला के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें किरायेदार को दुकान खाली करने का निर्देश दिया गया था।

विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बेदखली का आदेश पारित होने के बाद या अपील लंबित रहने के दौरान मकान मालिक की मृत्यु हो जाती है, तब भी उनके कानूनी वारिस उस संपत्ति को खाली कराने के पूर्ण हकदार हैं। मृत्यु होने मात्र से परिवार की जरूरत खत्म नहीं होती। यह पूरा विवाद 360 वर्ग फीट की दुकान से संबंधित है, जिसे मकान मालिक ने वर्ष 1989 में खरीदा था। मकान मालिक ने वर्ष 2017 में किरायेदार के खिलाफ बेदखली याचिका दायर की थी। इसमें मुख्य रूप से दो आधार बनाए गए थे। पहला किराये का बकाया होना और दूसरा स्वयं के उपयोग (विशेषकर मरीजों की सुविधा के लिए एक्स-रे मशीन लगाने) के लिए दुकान की वास्तविक आवश्यकता। रेंट कंट्रोलर शिमला ने 20 अक्तूबर 2021 को मकान मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दुकान खाली करने का आदेश दिया। 13 अक्तूबर 2023 को अपीलीय प्राधिकारी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। मामला लंबित रहने के दौरान मूल मकान मालिकों (पति और पत्नी दोनों) का निधन हो गया। इसके बाद किरायेदार ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि इस बाद के घटनाक्रम के कारण अब दुकान की निजी जरूरत का आधार ही समाप्त हो चुका है। किरायेदार का दावा था कि कानूनी वारिसों के पास पहले से ही पर्याप्त जगह उपलब्ध है, इसलिए बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed