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Himachal Budget 2025: एंटी हेलनेट पर बंद की गई सब्सिडी को बहाल करें, जानें बजट से किसानों-बागवानों की उम्मीदें

Sun, 16 Mar 2025 01:07 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 16 Mar 2025 01:07 PM IST
सार

हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है तो स्वाभाविक रूप से अगले बजट का फोकस भी इसी पर होगा। कृषि-बागवानी क्षेत्र को सरकार से काफी उम्मीदें हैं। 

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Himachal Budget 2025 know the expectations of farmers and gardeners from the budget
बजट से उम्मीद। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में आगामी वित्त वर्ष 2025-26 का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस रहने की संभावना है। यह बात मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने बिलासपुर में सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित किए गए समारोह में भी कहा था कि राहुल गांधी ने उन्हें इस दिशा में काम करने को कहा है। हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है तो स्वाभाविक रूप से अगले बजट का फोकस भी इसी पर होगा। कृषि-बागवानी क्षेत्र को सरकार से काफी उम्मीदें हैं। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में कृषि और संबंधित क्षेत्र से संबंधित राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्टअप और भेड़-बकरी पालक प्रोत्साहन योजना को शामिल किया गया। प्राकृतिक खेती से 36000 किसानों को जोड़ने और हर पंचायत से 10-10 किसानों का चयन करने का बीड़ा उठाया गया। 
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मोटे अनाज उगाने के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। नई मंडियां बनाने और पुरानी मंडियों का स्तरोन्नयन करने का भी फैसला लिया गया। गेहूं और मक्की का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। गेहूं का 40 और मक्की का 30 रुपये किया गया। कृषि बागवानी के लिए 1133 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। इसमें 582 करोड़ रुपये कृषि और 531 बागवानी के लिए प्रस्तावित किए गए। गाय और भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 45 और 55 रुपये तय किया गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में गाय के दूध का 38 और भैंस के दूध का 55 रुपये था। स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इन क्षेत्रों में की पहल को आगे बढ़ाएंगे तो कई नई योजनाएं भी वे कृषि क्षेत्र के लिए जा सकते हैं, जिससे कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
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खाद, दवाओं और उपकरणों पर उचित उपदान दिया जाए
जिला सोलन की अर्की तहसील पानण गांव के निवासी युवा किसान रविंद्र वशिष्ठ ने गत वर्ष कृषि क्षेत्र से जो घोषणाएं की गईं, उससे संतुष्ट नहीं हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस करने की बात की है। किसानों के हित में विशेष प्रावधान होंगे, उन्हें उम्मीद है। हमारे क्षेत्र में धान, मक्की, गेहूं, जौ आदि के साथ फलों को भी उगाया जा रहा है। फसलों का निश्चित मूल्य हो, उसके लिए नीति बनाई जाए। खादों, दवाओं, उपकरणों आदि पर उचित उपदान दिया जाए। किसानों को रियायती दरों पर फसलों के बीज भी उपलब्ध करवाए जाएं।

एंटी हेलनेट पर बंद की गई सब्सिडी को बहाल करें
कोटखाई के बखोल गांव के जाने-माने बागवान संजीव चौहान ने बताया कि एंटी हेलनेट सब्सिडी बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह उपदान मिलना चाहिए। कृषि और बागवानी के उपकरणों की सब्सिडी भी बहाल की जानी चाहिए। सिंचाई के साधनों पर भी उपदान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से उम्मीद है कि वे इस दिशा में जरूर कोई घोषणा करेंगे। खेतीबाड़ी और बागवानी वैसे भी घाटे का काम बन चुका है।
 
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