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हिमाचल: तीन से ज्यादा मंजिलों का मकान बनाने के लिए स्ट्रक्चर इंजीनियर की रिपोर्ट अनिवार्य, तभी मिलेगी वैधता

Sat, 13 Dec 2025 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 13 Dec 2025 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में ढाई मंजिला भवन निर्माण के लिए स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र जरूरी होगा। इन दस्तावेजों के बाद ही भवन को वैध माना जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal A structural engineer report is mandatory for constructing buildings with more than three floors
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अब तीन मंजिला से ज्यादा भवन निर्माण के लिए स्ट्रक्चर इंजीनियर की रिपोर्ट अनिवार्य होगी। ढाई मंजिला भवन निर्माण के लिए स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र जरूरी होगा। इन दस्तावेजों के बाद ही भवन को वैध माना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एचपीटीसीपी रूल्स 21 में यह प्रावधान किया है। पहले यह शर्त सरकारी भवन निर्माण के लिए होती थी, अब इसे आम लोगों के लिए भी लागू कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा के चलते भवनों को नुकसान हो रहा है। लोगों के मकान मजबूत और इंजीनियरों की सलाह से बनें, इसके लिए यह फैसला लिया गया है।

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टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने शिमला, कुल्लू, धर्मशाला, ऊना, मंडी, सोलन,नाहन और चंबा आदि शहदों के लिए डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। हिमाचल में प्राकृतिक आपदा से सरकारी और निजी भवनों को नुकसान हो रहा है। केंद्र की टीमों ने भी इसको लेकर हिमाचल का दौरा किया था। इस टीम की सचिवालय में हिमाचल के अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई थी। उन्होंने भी स्ट्रक्चर इंजीनियर और स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र को अनिवार्य करने की सुझाव दिया था। शिमला प्लानिंग एरिया में तीन से पांच मंजिला तक भवन बनाने को अनुमति दी गई है। जहां पांच मीटर सड़क है, वहां लोग पांच मंजिला तक भवन निर्माण कर सकते हैं। जहां सड़क सुविधा नहीं है, वहां दो मंजिला भवन और एटिक का निर्माण किया जा सकता है।

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टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि डेवलपमेंट प्लान में इस नियम को लागू किया गया है। सरकारी भवनों में इसे लागू कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में अब नालों और खड्डों के किनारे उचित दूरी पर ही भवनों का निर्माण करना होगा। नालों से 5 मीटर, जबकि खड्डों व नदी से 7 मीटर जगह छोड़कर ही भवनों का निर्माण करने के अनुमति दी जा रही है।
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