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शिमला: कसौली सामूहिक दुष्कर्म मामले में क्लोजर रिपोर्ट को हिमाचल हाईकोर्ट ने ठहराया सही

Fri, 11 Sep 2026 07:14 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 11 Sep 2026 07:14 PM IST
सार

न्यायाधीश राकेश कैंथला ने अदालत ने पीड़िता याचिकाकर्ता की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयानों के आधार पर किसी भी आरोपी को समन जारी करना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब मुख्य चश्मदीद गवाह ही दावों का खंडन कर रहा हो।

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High Court upholds closure report in Kasauli samuhik dushkarm case.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली के एक नामी होटल में कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की ओर से दाखिल कैंसिलेशन (क्लोजर) रिपोर्ट को सही ठहराया है। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने अदालत ने पीड़िता याचिकाकर्ता की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयानों के आधार पर किसी भी आरोपी को समन जारी करना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब मुख्य चश्मदीद गवाह ही दावों का खंडन कर रहा हो। उल्लेखनीय है कि पीड़िता ने 13 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 3 जुलाई 2023 को कसौली के एक नामी होटल में हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल ने उसे और उसकी सहेली को नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

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पुलिस जांच में घटना के कोई साक्ष्य नहीं मिले, इसके बाद कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 8 जनवरी 2026 को पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इस फैसले को पीड़िता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। पीड़िता ने दावा किया था कि घटना उसकी सहेली की मौजूदगी में हुई थी। हालांकि, सहेली ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई और पीड़िता और उसके नियोक्ता ने उसे झूठी गवाही देने के लिए पैसों का लालच दिया था। कोर्ट ने पाया कि कथित घटना जुलाई 2023 की थी, जबकि एफआईआर दिसंबर 2024 में करवाई गई। कोर्ट ने पाया कि इस 18 महीने की देरी का कोई तार्किक कारण नहीं दिया गया। पीड़िता ने मेडिकल ऑफिसर के समक्ष अपनी मेडिकल जांच कराने से साफ इन्कार कर दिया था, जिससे दुष्कर्म की पुष्टि के वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद नहीं थे।

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