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घंगोट पेयजल योजना से बिना फिल्टर पानी की हो रही सीधी सप्लाई
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गारली (हमीरपुर)। जलशक्ति विभाग उपमंडल बड़सर की घंगोट पेयजल योजना से लोगों को नाले का दूषित जल पिलाया जा रहा है। एलडब्ल्यूएसएस बणी-बड़सर-गारली की आईबी जोन घंगोट पेयजल स्कीम से पिछले कई महीनों से हजारों लोगों को नाले का दूषित जल पिलाया जा रहा है। पेयजल स्कीम के तीनों फिल्टर बेड और सेडिमिनेशन बेड कई महीनों से खराब पड़े हैं तथा इनमें कई महीनों से दूषित जल स्टोर है। जिनमें कीड़े और मछलियां तैरती हुई दिखाई दे रही हैं। बिना फिल्टर के ही सीधे नाले से पानी मेन टैंक में स्टोर होकर लोगों के घरों तक सप्लाई किया जा रहा है। जिस भंडारण टैंक से पानी स्टोर करके लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है, उसमें काफी कचरा भरा पड़ा है।
इस तरह दूषित जल पीने के लिए हजारों लोग मजबूर हैं। बावजूद इसके विभाग अनजान और मूकदर्शक बना हुआ है। साल में दो बार फिल्टर बेड और भंडारण टैंक की साफ सफाई करना अनिवार्य है और समय पर क्लोरीनेशन का कार्य करना जरूरी है। गंदा पानी पीने की वजह से डायरिया जैसी भयंकर बीमारी फैल सकती है। उपमंडल भोरंज में भी दूषित पानी पीने से करीब 500 लोग डायरिया की चपेट में आए हैं। नवंबर 2017 में भी घंगोट पेयजल योजना से नाले का पानी सीधा सप्लाई किया गया था और यह मुद्दा उठा था। जिस पर विभागीय अधिकारियों की जवाब तलबी की गई थी। लेकिन, विभागीय अधिकारियों ने सीख नहीं लेते हुए दोबारा बड़ी लापरवाही को जानबूझकर अंजाम दिया है। इस पेयजल स्कीम में दो पंचायतों के लगभग एक दर्जन गांव घंगोट-1,घंगोट-2,घंगोट-3, बडडू, गुतियाना, बटयाणा, जजल, घाटा पंगा, टघेन, धर्मशाला पिंड, नैन, तप्पा, रप्पड़ इत्यादि आते हैं। इनके ग्रामीण पिछले कई महीनों से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस संदर्भ में सहायक अभियंता जलशक्ति विभाग बड़सर सुरेश कुमार का कहना है कि इस तरह का मामला उनके ध्यानार्थ नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शिता से जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह स्वयं जाकर इस घटनाक्रम की जांच करेंगे।
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इस तरह दूषित जल पीने के लिए हजारों लोग मजबूर हैं। बावजूद इसके विभाग अनजान और मूकदर्शक बना हुआ है। साल में दो बार फिल्टर बेड और भंडारण टैंक की साफ सफाई करना अनिवार्य है और समय पर क्लोरीनेशन का कार्य करना जरूरी है। गंदा पानी पीने की वजह से डायरिया जैसी भयंकर बीमारी फैल सकती है। उपमंडल भोरंज में भी दूषित पानी पीने से करीब 500 लोग डायरिया की चपेट में आए हैं। नवंबर 2017 में भी घंगोट पेयजल योजना से नाले का पानी सीधा सप्लाई किया गया था और यह मुद्दा उठा था। जिस पर विभागीय अधिकारियों की जवाब तलबी की गई थी। लेकिन, विभागीय अधिकारियों ने सीख नहीं लेते हुए दोबारा बड़ी लापरवाही को जानबूझकर अंजाम दिया है। इस पेयजल स्कीम में दो पंचायतों के लगभग एक दर्जन गांव घंगोट-1,घंगोट-2,घंगोट-3, बडडू, गुतियाना, बटयाणा, जजल, घाटा पंगा, टघेन, धर्मशाला पिंड, नैन, तप्पा, रप्पड़ इत्यादि आते हैं। इनके ग्रामीण पिछले कई महीनों से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस संदर्भ में सहायक अभियंता जलशक्ति विभाग बड़सर सुरेश कुमार का कहना है कि इस तरह का मामला उनके ध्यानार्थ नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शिता से जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह स्वयं जाकर इस घटनाक्रम की जांच करेंगे।
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