{"_id":"63d6b9064d731b2cfd1b95b0","slug":"the-number-of-enteritis-patients-crossed-400-on-the-second-day-in-rangas-hamirpur-hp-news-sml434936617-2023-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: रंगस में दूसरे दिन आंत्रशोथ मरीजों का आंकड़ा 400 से पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: रंगस में दूसरे दिन आंत्रशोथ मरीजों का आंकड़ा 400 से पार
विज्ञापन
रंगस मे आंत्रशोथ से पीड़ित मरीजों के लिए उपलबध करवाए गए पेयजल टैंकर से पानी लेते लोग।
- फोटो : Hamirpur-HP
रंगस (हमीरपुर)। स्वास्थ्य खंड नादौन के तहत आने वाले जोलसप्पड़ और रंगस में दूसरे दिन भी आंत्रशोथ के 400 मामले सामने आए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भी मरीजों के घरों में जाकर दवाइयां दीं। आंत्रशोथ से क्षेत्र के दस गांव प्रभावित हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मरीजों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं और उन्हें जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध करवा रही हैं। वहीं, जल शक्ति विभाग ने भी बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों में बाहर से लाकर शील्ड वाटर और टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करवाया।
दूसरे दिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री भी मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने भी उल्टी और दस्त से पीड़ित मरीजों की जांच की। वहीं, क्षेत्र के कुछ पानी के सैंपल ठीक पाए गए हैं। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि रविवार को स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमों ने गांव बड़वाल, बलाहर, खैरी, डही ठपर, भलौन व पन्याला आदि गांवों में घर-घर जाकर मरीजों के स्वास्थ्य का हाल जाना। रविवार को इन क्षेत्रों से 400 से ऊपर मरीजों के प्रभावित होने की सूचना प्राप्त हुई।
मरीजों के अलावा क्षेत्र के स्वस्थ लोगों को भी पानी उबाल कर पीने की सलाह दी गई। यह बीमारी किसी भी खाद्य पदार्थ से हो सकती है तथा पानी से भी हो सकती है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि जल शक्ति विभाग को भी पानी के सैंपल लेने को कहा गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी प्रत्येक गांव से पानी के सैंपल एकत्रित कर रही है। वहीं, जल शक्ति विभाग नादौन के सहायक अभियंता रविंद्र इंदौरिया ने कहा कि नियाटी मझोट, मंझला बन्ह, हार परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र से लिए गए पानी के अधिकतर सैंपल फिलहाल सही पाए गए हैं। इसलिए आंत्रशोथ फैलने का कारण अन्य खाद्य पदार्थ भी हो सकते हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर जल भंडारण टैंकों की क्लोरीनेशन की जाती है।
विज्ञापन
विभाग ने डायरिया प्रभावित क्षेत्रों में बाहर से लाकर शील्ड डिस्टल वाटर और टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करवाया। अभी तक पेयजल योजनाओं की आपूर्ति को बंद रखा गया है। इसका निरीक्षण विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी रविवार को किया। प्रभावित क्षेत्रों से पानी के सैंपल लेने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि शीघ्र ही प्रभावित क्षेत्रों में एक चिकित्सकों की टीम बनाकर भेजी जाएगी और डायरिया से पीड़ित लोगों के सैंपल भी लिए जाएंगे। प्रभावित क्षेत्रों में यह देखा गया है कि पानी के स्रोतों के आसपास गंदगी के भी काफी ढेर लगे हुए हैं, जो भविष्य में और समस्या कर सकते हैं। इससे आंत्रशोथ बीमारी और बढ़ सकती है। बीमारी फैलने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
विज्ञापन
दूसरे दिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री भी मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने भी उल्टी और दस्त से पीड़ित मरीजों की जांच की। वहीं, क्षेत्र के कुछ पानी के सैंपल ठीक पाए गए हैं। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि रविवार को स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमों ने गांव बड़वाल, बलाहर, खैरी, डही ठपर, भलौन व पन्याला आदि गांवों में घर-घर जाकर मरीजों के स्वास्थ्य का हाल जाना। रविवार को इन क्षेत्रों से 400 से ऊपर मरीजों के प्रभावित होने की सूचना प्राप्त हुई।
विज्ञापन
मरीजों के अलावा क्षेत्र के स्वस्थ लोगों को भी पानी उबाल कर पीने की सलाह दी गई। यह बीमारी किसी भी खाद्य पदार्थ से हो सकती है तथा पानी से भी हो सकती है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि जल शक्ति विभाग को भी पानी के सैंपल लेने को कहा गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी प्रत्येक गांव से पानी के सैंपल एकत्रित कर रही है। वहीं, जल शक्ति विभाग नादौन के सहायक अभियंता रविंद्र इंदौरिया ने कहा कि नियाटी मझोट, मंझला बन्ह, हार परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र से लिए गए पानी के अधिकतर सैंपल फिलहाल सही पाए गए हैं। इसलिए आंत्रशोथ फैलने का कारण अन्य खाद्य पदार्थ भी हो सकते हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर जल भंडारण टैंकों की क्लोरीनेशन की जाती है।
विज्ञापन
विभाग ने डायरिया प्रभावित क्षेत्रों में बाहर से लाकर शील्ड डिस्टल वाटर और टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करवाया। अभी तक पेयजल योजनाओं की आपूर्ति को बंद रखा गया है। इसका निरीक्षण विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी रविवार को किया। प्रभावित क्षेत्रों से पानी के सैंपल लेने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि शीघ्र ही प्रभावित क्षेत्रों में एक चिकित्सकों की टीम बनाकर भेजी जाएगी और डायरिया से पीड़ित लोगों के सैंपल भी लिए जाएंगे। प्रभावित क्षेत्रों में यह देखा गया है कि पानी के स्रोतों के आसपास गंदगी के भी काफी ढेर लगे हुए हैं, जो भविष्य में और समस्या कर सकते हैं। इससे आंत्रशोथ बीमारी और बढ़ सकती है। बीमारी फैलने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।