फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   The disaster echoed in the assembly, the affected people were forced to sleep on the cold floor.

Hamirpur (Himachal) News: विधानसभा तक आपदा की गूंज, प्रभावित ठंडे फर्श पर सोने को मजबूर

Thu, 04 Dec 2025 01:02 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Thu, 04 Dec 2025 01:02 AM IST
विज्ञापन
The disaster echoed in the assembly, the affected people were forced to sleep on the cold floor.
पंचायत घर चबूतरा में ठहरे प्रभावित। महज दो चारपाई होने के चलते फर्श पर बिस्तर लगाना मजबूरी बन ग
हमीरपुर। दो सितंबर 2025 के दिन दोपहर बाद सुजानपर विस क्षेत्र के चबूतरा गांव में अचानक आई आपदा की गूंज बेशक इस बार विधानसभा के सत्र में सियासत के बहाने सुनाई दी है, लेकिन प्रभावित परिवार तीन माह बाद भी ठंडे फर्श पर सोने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

महज दरी और कंबल के सहारे फर्श पर इन प्रभावितों की सर्द रातें कट रही हैं। विधानसभा के पटल पर स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत राणा ने पूर्व विधायक राजेंद्र राणा को निशाने पर लेते हुए कहा कि मदद के तौर पर महज पुड़िया बांटकर मुख्यमंत्री सुक्खू पर वह सवाल उठाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। इस बयान के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने भी प्रतिक्रिया दी है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक प्रभावितों को महज 25 हजार की फौरी राहत दी है, जबकि इन प्रभावितों की न तो जमीन बची है और न ही घर। कुल मिलाकर सियायत के बहाने विधानसभा में चबूतरा गांव का नाम तो गूंजा है, लेकिन यह गूंज प्रभावितों के लिए राहत के बजाय सियासत बनकर रह गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आपदा से प्रभावित पांच परिवार किराये के कमरों, पंचायत घर और वन विभाग के विश्राम गृह में तीन माह से आश्रय लिए हुए हैं। दो परिवार अपने खर्चे पर किराये के कमरों में रह रहे हैं। पंचायत घर चबूतरा की ऊपरी मंजिल में नरोतम अपने एक बेटे, बहू, पत्नी और चार पोतों के साथ आश्रय लिए हुए है।
पंचायत के इस हॉल में दो चारपाई लगी है और सोने वाले आठ लोग हैं। नरोतम का कहना है कि एक बेटे सुमन अपनी पत्नी के साथ किराये के कमरे में रह रहे हैं। परिवार के आठ सदस्य पंचायत के हॉल में रह रहे हैं। यहां पर दो चारपाई लगी हैं। दो दिन पहले बच्चे ठंड के कारण बीमार भी हो गए। ठंड अधिक है फर्श पर बिस्तर लगाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार से 25 हजार की फौरी राहत मिली है और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने 50 हजार की मदद परिवारों को दी है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं ने भी मदद की है, लेकिन अब स्थाई छत की दरकार है। सरकार जल्द से जल्द जमीन और घर बनाने के लिए पैसा उपलब्ध करवा दे, ताकि बरसात से पहले उन्हें ठिकाना मिल सके।
नरोतम के परिवार की तरह ही वन विभाग के विश्राम गृह में बंशी राम का परिवार तीन माह से ठहरा हुआ है। नरोतम चंद का कहना है कि उनके भाई केवल कृष्ण की एक बहू गर्भवती है। ऐसे में जीवन निर्वाह में परिवार को खासी दिक्कत पेश आ रही है।




कोट
चबूतरा गांव में आपदा के दौरान बेघर परिवारों से मिलने वाले वह पहले व्यक्ति थे। उन्होंने प्रभावितों को अपनी ओर से 50,000 रुपये प्रति परिवार दिए हैं। घर से उनके लिए खाना बनाकर ले गए। इन परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन नहीं दी गई है। प्रभावित परिवारों को उन्होंने विकल्प दिया है कि वे उनके गांव पटलांदर में आकर बसें, यहां उन्हें वह अपनी मलकीयत भूमि देने को तैयार हैं।

-राजेंद्र राणा, पूर्व विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed