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परीक्षाओं के बीच सेमिनार से शिक्षक परेशान : संघ
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राजकीय टीजीटी कला संघ ने जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राजकीय टीजीटी कला संघ ने 23 मार्च तक सेमिनार लगाने का विरोध किया है। समग्र शिक्षा अभियान ने फरवरी और मार्च में अनेकों सेमिनार आयोजित किए हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में रिवीजन से लेकर फाइनल पेपर और पेपर चेकिंग के समय भी समग्र शिक्षा अभियान तरह-तरह से सेमिनार आयोजित कर रहा है। स्टार प्रोजेक्ट के तहत फरवरी में एक या दो सेमिनार आयोजित किए गए। इनमें 12 दिन शिक्षक व्यस्त रहे। अब विषय आधारित प्रशिक्षण के लिए फिर से पांच दिन के सेमिनार हो रहे हैं। कुछ शिक्षकों की डेढ़ माह में 17 दिन ट्रेनिंग पूरा होने जा रही है जबकि यह समय वार्षिक परीक्षाओं और मूल्यांकन का है। दिसंबर तक अगर इन सेमिनारों का आयोजन किया जाता है तो कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन अब विषय आधारित प्रशिक्षण, इंडक्शन ट्रेनिंग, स्वास्थ्य संबंधी ट्रेनिंग के नाम पर स्कूलों से शिक्षकों को अलग अलग स्थानों पर भेजा गया है। इसके चलते कई मिडिल स्कूल सिंगल टीचर हो रहे हैं। ऐसे में परीक्षाओं का संचालन और समय पर परीक्षा परिणाम तैयार करना मुश्किल हो रहा है। इस बार 24, 25 और 31 मार्च को अवकाश है और परीक्षा परिणाम 30 मार्च को घोषित करने हैं। ऐसे में 23 मार्च तक सेमिनार लगाने का राजकीय टीजीटी कला संघ ने विरोध किया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, प्रदेश महासचिव विजय हीर, प्रदेश प्रवक्ता संजय ठाकुर, दुनी चंद, सोहन सिंगटा, सुरेश कुमार, रणवीर तोमर, सागर चंदेल, संजय वर्मा, विजेश अत्री, विजय बरवाल, सुभाष भारती, राकेश चौधरी, पवन धीमान, कुलबीर सिंह, रिग्जिन संदप, यशपाल सिंह,जरनैल सिंह, रामकृष्ण आदि ने कहा कि सेमिनारों का आयोजन परीक्षाओं के मध्य और पेपर चेकिंग के बीच नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए साल भर पर्याप्त समय उपलब्ध रहता है। उन्होंने कहा कि अकादमिक कार्य पुराने क्ल्सटर सिस्टम में करने हैं तो नए क्लस्टर सिस्टम का औचित्य नहीं रह जाएगा। ऐसे में प्रशासनिक क्लस्टर के बजाय अकादमिक क्लस्टर में ही मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राजकीय टीजीटी कला संघ ने 23 मार्च तक सेमिनार लगाने का विरोध किया है। समग्र शिक्षा अभियान ने फरवरी और मार्च में अनेकों सेमिनार आयोजित किए हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में रिवीजन से लेकर फाइनल पेपर और पेपर चेकिंग के समय भी समग्र शिक्षा अभियान तरह-तरह से सेमिनार आयोजित कर रहा है। स्टार प्रोजेक्ट के तहत फरवरी में एक या दो सेमिनार आयोजित किए गए। इनमें 12 दिन शिक्षक व्यस्त रहे। अब विषय आधारित प्रशिक्षण के लिए फिर से पांच दिन के सेमिनार हो रहे हैं। कुछ शिक्षकों की डेढ़ माह में 17 दिन ट्रेनिंग पूरा होने जा रही है जबकि यह समय वार्षिक परीक्षाओं और मूल्यांकन का है। दिसंबर तक अगर इन सेमिनारों का आयोजन किया जाता है तो कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन अब विषय आधारित प्रशिक्षण, इंडक्शन ट्रेनिंग, स्वास्थ्य संबंधी ट्रेनिंग के नाम पर स्कूलों से शिक्षकों को अलग अलग स्थानों पर भेजा गया है। इसके चलते कई मिडिल स्कूल सिंगल टीचर हो रहे हैं। ऐसे में परीक्षाओं का संचालन और समय पर परीक्षा परिणाम तैयार करना मुश्किल हो रहा है। इस बार 24, 25 और 31 मार्च को अवकाश है और परीक्षा परिणाम 30 मार्च को घोषित करने हैं। ऐसे में 23 मार्च तक सेमिनार लगाने का राजकीय टीजीटी कला संघ ने विरोध किया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, प्रदेश महासचिव विजय हीर, प्रदेश प्रवक्ता संजय ठाकुर, दुनी चंद, सोहन सिंगटा, सुरेश कुमार, रणवीर तोमर, सागर चंदेल, संजय वर्मा, विजेश अत्री, विजय बरवाल, सुभाष भारती, राकेश चौधरी, पवन धीमान, कुलबीर सिंह, रिग्जिन संदप, यशपाल सिंह,जरनैल सिंह, रामकृष्ण आदि ने कहा कि सेमिनारों का आयोजन परीक्षाओं के मध्य और पेपर चेकिंग के बीच नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए साल भर पर्याप्त समय उपलब्ध रहता है। उन्होंने कहा कि अकादमिक कार्य पुराने क्ल्सटर सिस्टम में करने हैं तो नए क्लस्टर सिस्टम का औचित्य नहीं रह जाएगा। ऐसे में प्रशासनिक क्लस्टर के बजाय अकादमिक क्लस्टर में ही मूल्यांकन किया जाना चाहिए।