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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Supreme Court should be respected for Shastri and language teachers

शास्त्री और भाषा अध्यापकों के लिए सर्वोच्च न्यायालय का हो सम्मान

Thu, 15 Jul 2021 12:09 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:09 AM IST
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हमीरपुर। भाषा और शास्त्री अध्यापकों को टीजीटी बनाने के लिए पंजाब हरियाणा की तर्ज पर निर्णय लिया है। इससे जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी सम्मान प्रस्ताव निर्माण के दौरान किया जाए। हरियाणा में सीएंडवी वर्ग के शिक्षकों को 2012 में टीजीटी कैडर में लाया गया और फिर इन शिक्षकों ने टीजीटी संवर्ग के लिए आरक्षित हेडमास्टर कोटा में पदोन्नतियां मांगी।
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इस पर मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया और एसएलपी संख्या 11295/2019 के अंतर्गत 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उनको टीजीटी फीडिंग काडर से हेडमास्टर सहित अन्य को पदोन्नति देने के निर्णय को गलत ठहराते हुए खारिज कर दिया। यह जानकारी देते हुए हिमाचल प्रदेश राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, उपाध्यक्ष मदन लाल, महासचिव विजय हीर, स्टेट सदस्य देशराज और संजय ठाकुर, ओमप्रकाश, पवन रांगड़ा, जिला इकाईयों के प्रधान विजय बरवाल, संजय चौधरी, रविंद्र गुलेरिया, राकेश चौधरी, डॉ सुनील दत्त, नीरज भारद्वाज, रिग्जिन सैंडप, शेर सिंह ,पुष्पराज खिमटा, रामकृष्ण, अमित छाबड़ा, देशराज शर्मा ने प्रदेश सरकार को इस निर्णय को फाइनल करने से पहले टीजीटी संघों से वार्ता करने की अपील की है। वरना शिक्षक संघ वैधानिक लड़ाई शुरू करेगा। संघ ने कहा कि टीजीटी कैडर के 14224 चिह्नित पदों में दस प्रतिशत पद पदोन्नति से भरने के लिए सीएंड वी शिक्षकों के लिए कई वर्षों से आरक्षित हैं और राज्य में स्नातक बीएड शास्त्री और भाषा अध्यापक इस कोटे से टीजीटी पदोन्नत होते हैं मगर इसके लिए उनको टीजीटी टीईटी पास करना होता है जोकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में अनिवार्य है।
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