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हड़ताल : टीबी और कोरोना टेस्टिंग समेत लिपकीय कार्य प्रभावित
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भोरंज में में हड़ताल के दौरान एनएचएम कर्मचारी।
- फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे जिले के 91 कर्मचारियों के कारण टीबी और कोरोना की टेस्टिंग समेत अस्पताल में लिपकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना की संकलित रिपोर्ट बनाने के लिए भी एनएचएम के कर्मचारी ही तैनात हैं, ऐसे में यह रिपोर्ट भी नहीं बन पा रही है। महज कुल संक्रमित और कुल टेस्ट का ही पता लग पा रहा है। इसके अलावा टीबी मरीजों की जांच व बलगम जांच के लिए भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारी तैनात हैं। ऐसे में इन मरीजों के बलगम की जांच भी समय पर नहीं होने से इनके उपचार में देरी हो रही है। इन कर्मचारियों की मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
जिला में स्वास्थ्य समिति एनएचएम के 91 कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य समिति एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रेस प्रवक्ता राज महाजन ने बताया कि कोरोना काल में इन कर्मचारियों ने अपनी जान हथेली पर रखकर कार्य किया। इन कर्मचारियों ने कोरोना सैंपलिंग, वैक्सीनेशन से लेकर संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए अपनी सेवाएं दिन रात दीं, लेकिन सरकार इनके साथ अन्याय कर रही है। प्रदेश में 1700 और जिले में 91 कर्मचारी हड़ताल में भाग ले रहे हैं।
इन कर्मचारियों की मांग है कि इनके लिए सरकार स्थायी नीति और रेगुलर पे स्केल का प्रबंध करे। हालांकि, 2016 में सरकार ने एक नोटिफिकेशन निकाली थी और स्थायी नीति बनाने की बात की थी, लेकिन पांच साल बीतने पर भी कोई कार्रवाई सरकार की ओर से अमल में नहीं लाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती है, उनका काम छोड़ो आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि इन कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से कोरोना टेस्टिंग में कमी आई है।
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बुधवार को रैपिड एंटीजन के 445 सैंपल लिए गए थे, मंगलवार को 466 तो हड़ताल से पहले सोमवार को 615 थे। यह कर्मचारी भोरंज, बड़सर, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर, भोटा, सुजानपुर सहित जिले के अन्य अस्पतालों में हड़ताल पर हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय जगोता का कहना है कि कोरोना संक्रमण के आंकड़ों की संकलित रिपोर्ट बनाने के लिए एनएचएम के कर्मचारी तैनात हैं। इस कारण वह कार्य प्रभावित हुआ है। टीबी टेस्टिंग के लिए भी यही कर्मचारी हैं, लेकिन कोरोना टेस्टिंग लगातार हो रही है, बारिश के कारण कुछ कम टेस्टिंग हुई होगी। कुछेक जगह जहां एनएचएम कर्मचारी टेस्टिंग कर रहे थे, वहीं उनके साथ अन्य कर्मचारी भी तैनात हैं।
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जिला में स्वास्थ्य समिति एनएचएम के 91 कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य समिति एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रेस प्रवक्ता राज महाजन ने बताया कि कोरोना काल में इन कर्मचारियों ने अपनी जान हथेली पर रखकर कार्य किया। इन कर्मचारियों ने कोरोना सैंपलिंग, वैक्सीनेशन से लेकर संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए अपनी सेवाएं दिन रात दीं, लेकिन सरकार इनके साथ अन्याय कर रही है। प्रदेश में 1700 और जिले में 91 कर्मचारी हड़ताल में भाग ले रहे हैं।
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इन कर्मचारियों की मांग है कि इनके लिए सरकार स्थायी नीति और रेगुलर पे स्केल का प्रबंध करे। हालांकि, 2016 में सरकार ने एक नोटिफिकेशन निकाली थी और स्थायी नीति बनाने की बात की थी, लेकिन पांच साल बीतने पर भी कोई कार्रवाई सरकार की ओर से अमल में नहीं लाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती है, उनका काम छोड़ो आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि इन कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से कोरोना टेस्टिंग में कमी आई है।
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बुधवार को रैपिड एंटीजन के 445 सैंपल लिए गए थे, मंगलवार को 466 तो हड़ताल से पहले सोमवार को 615 थे। यह कर्मचारी भोरंज, बड़सर, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर, भोटा, सुजानपुर सहित जिले के अन्य अस्पतालों में हड़ताल पर हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय जगोता का कहना है कि कोरोना संक्रमण के आंकड़ों की संकलित रिपोर्ट बनाने के लिए एनएचएम के कर्मचारी तैनात हैं। इस कारण वह कार्य प्रभावित हुआ है। टीबी टेस्टिंग के लिए भी यही कर्मचारी हैं, लेकिन कोरोना टेस्टिंग लगातार हो रही है, बारिश के कारण कुछ कम टेस्टिंग हुई होगी। कुछेक जगह जहां एनएचएम कर्मचारी टेस्टिंग कर रहे थे, वहीं उनके साथ अन्य कर्मचारी भी तैनात हैं।