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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Six new cases of Lumpy Skin Disease reported; number of infected animals reaches 40.

Hamirpur (Himachal) News: लंपी स्किन डिजीज के छह नए मामले आए, संक्रमित पशुओं की संख्या 40 पहुंची

Wed, 26 Aug 2026 01:52 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Wed, 26 Aug 2026 01:52 AM IST
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हमीरपुर। जिले में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को छह नए मामले सामने आने के बाद संक्रमित पशुओं की संख्या 40 पहुंच गई है।
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इनमें से तीन पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि करीब 37 पशु अभी सक्रिय मामलों में शामिल हैं। मंगलवार को बड़सर क्षेत्र में एक और पशु की मौत हो गई। इससे जिले में बीमारी से मरने वाले पशुओं की संख्या दो हो गई है।
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बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभाग की ओर से अब तक करीब 1,500 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि लंपी से बचाव के लिए करीब 13,500 टीके उपलब्ध हैं।
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प्रभावित क्षेत्रों के साथ अन्य इलाकों में भी पशुओं में बीमारी के लक्षणों पर नजर रखी जा रही है। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें अन्य पशुओं से अलग रखें और बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें।
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कैसे फैलता है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है। यह मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक जैसे रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैल सकता है। बीमारी में पशु को बुखार आने के बाद शरीर की त्वचा पर गोल और उभरी हुई गांठें या नोड्यूल बनने लगते हैं।
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पशु की सेहत और दूध की उत्पादकता पर असर
बीमारी का असर पशु की सामान्य सेहत और उत्पादकता पर पड़ता है। संक्रमित पशु में कमजोरी, बुखार, त्वचा पर गांठें, भूख में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में पशु को लंबे समय तक स्वस्थ होने में परेशानी हो सकती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है।



कोट
जिले में पशुओं का व्यापक रूप से टीकाकरण किया जा रहा है। पशुपालक गोवंश का टीकाकरण जरूर करवाएं। -डॉ. सतीश, सहायक निदेशक परियोजना, पशुपालन विभाग हमीरपुर
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