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Hamirpur (Himachal) News: बैठक में नहीं पहुंचे सीनियर अफसर, निधि लेखा समिति ने शिमला किए तलब
Sat, 24 Oct 2026 01:33 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:33 AM IST
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति में अधिकारियों को निर्देश देते सभापति संजय रत
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जाहिर की है। समिति ने मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर शिमला में समिति के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को हमीर भवन में जिला अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत में समिति के सभापति संजय रत्न ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में विभिन्न विभागों, बोर्डों-निगमों, संस्थानों और शहरी निकायों की आय-व्यय, ऑडिट पैरा और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए।
संजय रत्न ने कहा कि कुछ अधिकारियों को यह गलतफहमी थी कि उनके विभाग से संबंधित कोई ऑडिट पैरा नहीं है, इसलिए बैठक में उपस्थित होना जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा की समिति की बैठक का महत्व मिनी विधानसभा जैसा है और सभी संबंधित अधिकारियों को इसमें उपस्थित रहना चाहिए। कुछ अधिकारी देरी से भी पहुंचे।
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अनुपस्थित अधिकारियों को जवाब देने के लिए शिमला बुलाया गया है। वहां उनके जवाब सुने जाएंगे। यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर समिति का निरादर किया है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में समिति के सभापति विधायक संजय रत्न, सदस्य विधायक कुलदीप सिंह राठौर, इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन और विवेक शर्मा के अलावा विधायक सुरेश कुमार ने भी भाग लिया। इस दौरान अधिकारियों से विभिन्न मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।
सभापति ने संबंधित अधिकारियों को सभी ऑडिट पैरा का निपटारा करवाने के लिए त्वरित कदम उठाने और 31 दिसंबर तक विस्तृत रिपोर्ट समिति को भेजने के निर्देश दिए, ताकि 31 मार्च तक इनका समायोजन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने वर्ष 2000 से पहले के लंबित छोटे-छोटे ऑडिट पैरा को समाप्त करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा। दो से तीन रुपये तक की राशि वाले पैरा की रिपोर्ट भी 31 दिसंबर तक स्टेट ऑडिट को भेजने के निर्देश दिए।
संजय रत्न ने कहा कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन कर उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्हें समर्पण, तत्परता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समिति के विभिन्न जिलों के प्रवास का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और समीक्षा करना तथा सरकारी तंत्र में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। सभी अधिकारियों को समिति के निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना करनी होगी और किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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शुक्रवार को हमीर भवन में जिला अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत में समिति के सभापति संजय रत्न ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में विभिन्न विभागों, बोर्डों-निगमों, संस्थानों और शहरी निकायों की आय-व्यय, ऑडिट पैरा और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए।
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संजय रत्न ने कहा कि कुछ अधिकारियों को यह गलतफहमी थी कि उनके विभाग से संबंधित कोई ऑडिट पैरा नहीं है, इसलिए बैठक में उपस्थित होना जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा की समिति की बैठक का महत्व मिनी विधानसभा जैसा है और सभी संबंधित अधिकारियों को इसमें उपस्थित रहना चाहिए। कुछ अधिकारी देरी से भी पहुंचे।
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अनुपस्थित अधिकारियों को जवाब देने के लिए शिमला बुलाया गया है। वहां उनके जवाब सुने जाएंगे। यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर समिति का निरादर किया है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में समिति के सभापति विधायक संजय रत्न, सदस्य विधायक कुलदीप सिंह राठौर, इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन और विवेक शर्मा के अलावा विधायक सुरेश कुमार ने भी भाग लिया। इस दौरान अधिकारियों से विभिन्न मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।
सभापति ने संबंधित अधिकारियों को सभी ऑडिट पैरा का निपटारा करवाने के लिए त्वरित कदम उठाने और 31 दिसंबर तक विस्तृत रिपोर्ट समिति को भेजने के निर्देश दिए, ताकि 31 मार्च तक इनका समायोजन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने वर्ष 2000 से पहले के लंबित छोटे-छोटे ऑडिट पैरा को समाप्त करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा। दो से तीन रुपये तक की राशि वाले पैरा की रिपोर्ट भी 31 दिसंबर तक स्टेट ऑडिट को भेजने के निर्देश दिए।
संजय रत्न ने कहा कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन कर उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्हें समर्पण, तत्परता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समिति के विभिन्न जिलों के प्रवास का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और समीक्षा करना तथा सरकारी तंत्र में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। सभी अधिकारियों को समिति के निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना करनी होगी और किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति में अधिकारियों को निर्देश देते सभापति संजय रत