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Hamirpur (Himachal) News: पीएनबी के पक्ष में फैसला, 7.70 लाख रुपये की वसूली के आदेश
Wed, 02 Sep 2026 01:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:17 AM IST
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हमीरपुर। सीनियर सिविल जज सूर्य प्रकाश की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सुजानपुर शाखा की ओर से दायर रिकवरी मुकदमे का निपटारा करते हुए बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने सुजानपुर की एक फर्म को 7,70,115 रुपये की बकाया राशि बैंक को अदा करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही 17 अगस्त 2018 से पूरी राशि की वसूली तक 11.75 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामले के अनुसार, सुजानपुर में स्टील और वुडन फर्नीचर निर्माण का कारोबार करने वाली फर्म की प्रोपराइटर ने सितंबर 2016 में पीएनबी की सुजानपुर शाखा से कारोबार के लिए वित्तीय सुविधा ली थी।
बैंक ने छह लाख रुपये की कैश क्रेडिट सीमा और तीन लाख रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया था। ऋण लेने के बाद खाते में अनियमितताएं सामने आने लगीं और निर्धारित भुगतान नहीं किया गया। लगातार भुगतान न होने पर बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया और बकाया राशि की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से अधिवक्ता ने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं, प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लेने और वर्ष 2018 में मुकदमा दायर किए जाने के समय करीब 7.70 लाख रुपये बकाया होने की बात स्वीकार की।
अदालत ने दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने प्रतिवादियों को 7,70,115 रुपये की बकाया राशि 11.75 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित बैंक को लौटाने के आदेश दिए हैं। ब्याज की गणना 17 अगस्त 2018 से पूरी रकम की वसूली तक की जाएगी।
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इसके साथ ही 17 अगस्त 2018 से पूरी राशि की वसूली तक 11.75 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामले के अनुसार, सुजानपुर में स्टील और वुडन फर्नीचर निर्माण का कारोबार करने वाली फर्म की प्रोपराइटर ने सितंबर 2016 में पीएनबी की सुजानपुर शाखा से कारोबार के लिए वित्तीय सुविधा ली थी।
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बैंक ने छह लाख रुपये की कैश क्रेडिट सीमा और तीन लाख रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया था। ऋण लेने के बाद खाते में अनियमितताएं सामने आने लगीं और निर्धारित भुगतान नहीं किया गया। लगातार भुगतान न होने पर बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया और बकाया राशि की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से अधिवक्ता ने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं, प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लेने और वर्ष 2018 में मुकदमा दायर किए जाने के समय करीब 7.70 लाख रुपये बकाया होने की बात स्वीकार की।
अदालत ने दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने प्रतिवादियों को 7,70,115 रुपये की बकाया राशि 11.75 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित बैंक को लौटाने के आदेश दिए हैं। ब्याज की गणना 17 अगस्त 2018 से पूरी रकम की वसूली तक की जाएगी।