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भोलेनाथ के आंसुओं से पैदा हुए रुद्राक्ष : शर्मा
Wed, 30 Jul 2025 01:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 30 Jul 2025 01:17 AM IST
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साहनवीं पंचायत में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत जागरूक पाठक
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत साहनवीं के तहत ककोण गांव में आयोजित शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य अश्विनी कुमार शर्मा रुद्राक्ष के प्रकारों का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष 14 प्रकार के होते हैं, जो भोलेनाथ के आंसुओं से पैदा हुए हैं। भोलेनाथ के आंसू मथुरा, अयोध्या, काशी और श्रीलंका में गिरे तो वहां पर रुद्राक्ष के वृक्ष पैदा हो गये। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष धारण करने से कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
वैदिक पुराणों में भी रूद्राक्ष ग्रहण करने के कई महत्व बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरदिन बिल्व वृक्ष के दर्शन पर पापों से मुक्ति मिलती है और जो व्यक्ति बिल्व वृक्ष लगाता है। उसके सभी पापों का नाश होता है। श्रावण मास में शिव महापुराण की कथा सुनना सर्वश्रेष्ठ है। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
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डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत साहनवीं के तहत ककोण गांव में आयोजित शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य अश्विनी कुमार शर्मा रुद्राक्ष के प्रकारों का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष 14 प्रकार के होते हैं, जो भोलेनाथ के आंसुओं से पैदा हुए हैं। भोलेनाथ के आंसू मथुरा, अयोध्या, काशी और श्रीलंका में गिरे तो वहां पर रुद्राक्ष के वृक्ष पैदा हो गये। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष धारण करने से कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
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वैदिक पुराणों में भी रूद्राक्ष ग्रहण करने के कई महत्व बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरदिन बिल्व वृक्ष के दर्शन पर पापों से मुक्ति मिलती है और जो व्यक्ति बिल्व वृक्ष लगाता है। उसके सभी पापों का नाश होता है। श्रावण मास में शिव महापुराण की कथा सुनना सर्वश्रेष्ठ है। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
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