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Hamirpur (Himachal) News: डोली घराना में खेल परिसर निर्माण के लिए जमीन देने से लोगों ने किया इन्कार
Fri, 19 Dec 2025 01:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 19 Dec 2025 01:00 AM IST
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डोली घराना के ग्रामीणों को भूमि अधिग्रहण के मामले में समझाते हुए एडीसी अभिषेक गर्ग। स्रोत जागरू
नादौन(हमीरपुर)। उपमंडल नादौन के अंतर्गत कोहला के डोली घराना गांव में प्रस्तावित खेल परिसर निर्माण का ग्रामीणों ने विरोध किया और भूमि देने से इंकार कर दिया। वीरवार को एसडीएम कार्यालय में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के पुनर्स्थापन के लिए जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दाैरान जनसमस्याओं को सुनने से पहले ही मामला इतना उलझ गया कि लोगों ने सरकार पर भूमि देने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि इस जमीन का सोशल इंपैक्ट असेसमेंट पहले हो चुका है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण एक्ट की धारा 11 के तहत यहां पर अनिवार्य जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। हालांकि वीरवार को यहां पर महज पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पर चर्चा तय थी, लेकिन चर्चा के दौरान लोगों की जमीन की तकसीम और अन्य व्यक्तिगत जमीनी मसले भी उजागर हुए हैं।
घृहत बाहती चाहंग महासभा के अध्यक्ष आशुतोष पराशर, रमेश चौधरी, लाल चंद चौधरी, सुभाष चंद, सुनील अवस्थी, ब्रह्मी देवी, रजो देवी व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहले भी सरकार को भूमि न देने का आग्रह किया था, लेकिन आग्रह के बाद भी ग्रामीणों पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वे निर्माण के लिए चयनित की गई भूमि पर खेतीबाड़ी करते हैं, जिससे सभी परिवारों का पालन पोषण होता है, लेकिन सरकार व प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की सुविधा को दरकिनार कर जबरदस्ती पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन करवाने में लगे हुए हैं।
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इसके बाद मौके पर लोगों की मांगे सुनने के लिए पहुंचे भूमि अधिग्रहण प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कार्य के प्रशासक व एडीसी अभिषेक गर्ग ने लोगों को समझाया कि आप लिखित रूप में अपनी आपत्तियां विभाग को प्रस्तुत करें, ताकि समस्या को सरकार के समक्ष रखा जा सके। 31 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं।
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इस दाैरान जनसमस्याओं को सुनने से पहले ही मामला इतना उलझ गया कि लोगों ने सरकार पर भूमि देने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि इस जमीन का सोशल इंपैक्ट असेसमेंट पहले हो चुका है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण एक्ट की धारा 11 के तहत यहां पर अनिवार्य जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। हालांकि वीरवार को यहां पर महज पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पर चर्चा तय थी, लेकिन चर्चा के दौरान लोगों की जमीन की तकसीम और अन्य व्यक्तिगत जमीनी मसले भी उजागर हुए हैं।
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घृहत बाहती चाहंग महासभा के अध्यक्ष आशुतोष पराशर, रमेश चौधरी, लाल चंद चौधरी, सुभाष चंद, सुनील अवस्थी, ब्रह्मी देवी, रजो देवी व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहले भी सरकार को भूमि न देने का आग्रह किया था, लेकिन आग्रह के बाद भी ग्रामीणों पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वे निर्माण के लिए चयनित की गई भूमि पर खेतीबाड़ी करते हैं, जिससे सभी परिवारों का पालन पोषण होता है, लेकिन सरकार व प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की सुविधा को दरकिनार कर जबरदस्ती पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन करवाने में लगे हुए हैं।
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इसके बाद मौके पर लोगों की मांगे सुनने के लिए पहुंचे भूमि अधिग्रहण प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कार्य के प्रशासक व एडीसी अभिषेक गर्ग ने लोगों को समझाया कि आप लिखित रूप में अपनी आपत्तियां विभाग को प्रस्तुत करें, ताकि समस्या को सरकार के समक्ष रखा जा सके। 31 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं।