{"_id":"680be2726992b3447000d6c9","slug":"raised-awareness-on-environmental-protection-and-entrepreneurship-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1001-154212-2025-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: पर्यावरण संरक्षण एवं उद्यमिता विषय पर किया जागरूक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: पर्यावरण संरक्षण एवं उद्यमिता विषय पर किया जागरूक
Sat, 26 Apr 2025 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 26 Apr 2025 12:58 AM IST
विज्ञापन
चोड़ू पंचायत में विशेष शिविर के दौरान उपस्थित लोग। स्रोतपंचायत
नादौन(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत चौडू में शुक्रवार को स्वास्थ्य, पर्यावरण, सांस्कृतिक संरक्षण एवं उद्यमिता के अवसर विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह आयोजन हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री कॉलेज, थुनाग (डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन) तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। यह पहल विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण के अंतर्गत ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
कार्यक्रम के दौरान फनेरा वह्ली (टौर) पौधे के पारिस्थितिकीय लाभों और संरक्षण मूल्य पर विस्तार से चर्चा की गई। यह पौधा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता को प्रोत्साहित करने तथा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है। इसकी बड़ी और मजबूत पत्तियां सिंगल यूज़ प्लास्टिक के पर्यावरणीय विकल्प के रूप में प्रयोग की जा रही हैं। इनसे बनने वाले पत्तल, डोने आदि अब बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
विज्ञापन
इस कार्यक्रम में डॉ. विजय राणा, डॉ. किशोर कुमार ठाकुर, डॉ. किशोर शर्मा, डॉ. सरिता और कृषि विभाग नादौन के डॉ. अंकुश शर्मा एवं डॉ. ऋषिदेव जरयाल ने विभिन्न पहलुओं और मार्केटिंग के विषय पर किसानों को जागरूक किया। ग्राम पंचायत प्रधान इंदुबाला ने सभी वैज्ञानिकों को इस कार्यक्रम को आयोजित करने पर धन्यवाद किया।
विज्ञापन
यह आयोजन हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री कॉलेज, थुनाग (डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन) तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। यह पहल विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण के अंतर्गत ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
विज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान फनेरा वह्ली (टौर) पौधे के पारिस्थितिकीय लाभों और संरक्षण मूल्य पर विस्तार से चर्चा की गई। यह पौधा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता को प्रोत्साहित करने तथा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है। इसकी बड़ी और मजबूत पत्तियां सिंगल यूज़ प्लास्टिक के पर्यावरणीय विकल्प के रूप में प्रयोग की जा रही हैं। इनसे बनने वाले पत्तल, डोने आदि अब बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
विज्ञापन
इस कार्यक्रम में डॉ. विजय राणा, डॉ. किशोर कुमार ठाकुर, डॉ. किशोर शर्मा, डॉ. सरिता और कृषि विभाग नादौन के डॉ. अंकुश शर्मा एवं डॉ. ऋषिदेव जरयाल ने विभिन्न पहलुओं और मार्केटिंग के विषय पर किसानों को जागरूक किया। ग्राम पंचायत प्रधान इंदुबाला ने सभी वैज्ञानिकों को इस कार्यक्रम को आयोजित करने पर धन्यवाद किया।