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Hamirpur (Himachal) News: रंगस पन्याला और नौहंगी भूंपल जल परियोजनाओं से मिलेगा शुद्ध पेयजल
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कुणाह खड्ड में स्थित दूषित जल उपचार संयंत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर
जलशक्ति विभाग दो करोड़ की लागत से करवा रहा है संयंत्र का निर्माण
अप्रैल के अंत में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने की योजना, जल जनित रोगों से मिलेगा छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। जल परियोजनाओं रंगस-पन्याला, मंजला बन्ह हार, नियाटी मझोट और नौहंगी-भूंपल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रवासियों को गर्मी के मौसम में जल शक्ति विभाग दूषित जल उपचार संयंत्र के माध्यम से ट्रीटेड वाटर (अपशिष्ट जल) हर हाल में उपलब्ध करवाएगा। इससे क्षेत्र में जलजनित रोग फैलने की संभावना बिल्कुल ही कम हो जाएगी। गत वर्ष जनवरी में इन परियोजनाओं के तहत आने वाले क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से डायरिया फैला था। इसकी वजह से एक हजार के करीब लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे। यही कारण था कि विभाग के उच्च अधिकारियों समेत प्रशासन व शासन को यहां तक की जल शक्ति विभाग के मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को भी कुणाह खड्ड में पहुंचकर परियोजनाओं का निरीक्षण करना पड़ा था। उसके बाद ही सरकार की ओर से सभी जल परियोजनाओं में दूषित जल उपचार संयंत्र का निर्माण करने की घोषणा करनी पड़ी थी।
विभाग के सहायक अभियंता उपमंडल नादौन अमित चौधरी ने कहा कि विभाग की ओर से नौहंगी-भूंपल जल परियोजनाओं के तहत डेढ़ करोड़ रुपये की धन राशि खर्च करके 1.10 एमएलडी यानी इसकी क्षमता 11 लाख लीटर पानी का प्रतिदिन उपचार करने की होगी। दूसरी ओर पन्याला रंगस, नियाटी मझोट व मंजला बन्ह हार परियोजना के लिए बनने वाले जल उपचार संयंत्र पर 85 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। इसकी क्षमता 1.5 एमएलडी यानी पांच लाख लीटर पानी प्रतिदिन उपचार करने की होगी। दोनों का निर्माण कार्य एक साथ प्रगति पर चल रहा है और अप्रैल व मई माह के अंत तक क्षेत्र के लोगों को उपचार किया गया शुद्ध पेयजल उपलब्ध विभाग की ओर से करवा दिया जाएगा।
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जलशक्ति विभाग दो करोड़ की लागत से करवा रहा है संयंत्र का निर्माण
अप्रैल के अंत में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने की योजना, जल जनित रोगों से मिलेगा छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। जल परियोजनाओं रंगस-पन्याला, मंजला बन्ह हार, नियाटी मझोट और नौहंगी-भूंपल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रवासियों को गर्मी के मौसम में जल शक्ति विभाग दूषित जल उपचार संयंत्र के माध्यम से ट्रीटेड वाटर (अपशिष्ट जल) हर हाल में उपलब्ध करवाएगा। इससे क्षेत्र में जलजनित रोग फैलने की संभावना बिल्कुल ही कम हो जाएगी। गत वर्ष जनवरी में इन परियोजनाओं के तहत आने वाले क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से डायरिया फैला था। इसकी वजह से एक हजार के करीब लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे। यही कारण था कि विभाग के उच्च अधिकारियों समेत प्रशासन व शासन को यहां तक की जल शक्ति विभाग के मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को भी कुणाह खड्ड में पहुंचकर परियोजनाओं का निरीक्षण करना पड़ा था। उसके बाद ही सरकार की ओर से सभी जल परियोजनाओं में दूषित जल उपचार संयंत्र का निर्माण करने की घोषणा करनी पड़ी थी।
विभाग के सहायक अभियंता उपमंडल नादौन अमित चौधरी ने कहा कि विभाग की ओर से नौहंगी-भूंपल जल परियोजनाओं के तहत डेढ़ करोड़ रुपये की धन राशि खर्च करके 1.10 एमएलडी यानी इसकी क्षमता 11 लाख लीटर पानी का प्रतिदिन उपचार करने की होगी। दूसरी ओर पन्याला रंगस, नियाटी मझोट व मंजला बन्ह हार परियोजना के लिए बनने वाले जल उपचार संयंत्र पर 85 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। इसकी क्षमता 1.5 एमएलडी यानी पांच लाख लीटर पानी प्रतिदिन उपचार करने की होगी। दोनों का निर्माण कार्य एक साथ प्रगति पर चल रहा है और अप्रैल व मई माह के अंत तक क्षेत्र के लोगों को उपचार किया गया शुद्ध पेयजल उपलब्ध विभाग की ओर से करवा दिया जाएगा।
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