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हड्डी रोग ओपीडी में महज एक डॉक्टर, 180 मरीज पहुंच गए इलाज करवाने

Tue, 02 Mar 2021 11:41 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Mar 2021 11:41 PM IST
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patient face problems in medical college hamirpur
हड्डी रोग ओपीडी के बाहर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करता सुरक्षा कर्मी। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में कोरोना से बेखौफ होकर लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में रोजाना 1100 से ऊपर मरीजों की पर्चियां बन रही हैं। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के हड्डी रोग विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ रही। यहां मंगलवार को उपचार के लिए 180 मरीज पहुंचे। सुबह साढ़े नौ बजे से ही ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ लगना शुरू हो गई। 12 बजे तक सुबह दस बजे पहुंचे मरीजों का नंबर भी नहीं पड़ा। अमर उजाला की टीम जब 12 बजे ओपीडी के बाहर पहुंची तो ओपीडी में महज एक चिकित्सक था और बाहर करीब एक सौ लोगों की भीड़ लगी थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक सुरक्षा कर्मी और एक महिला कर्मचारी काम में लगे थे, लेकिन लोग कोरोना से बेखौफ होकर एक दूसरे के साथ चिपक कर खड़े रहे और अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
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दरअसल मंगलवार को हड्डी रोगों के ऑपरेशन भी होते हैं, इस कारण ओपीडी में एक ही चिकित्सक सेवाएं दे रहा था। लेकिन, मंगलवार को भी लोगों की भीड़ यहां उमड़ गई। हड्डी रोग ओपीडी के साथ ही छाती रोग ओपीडी है। लेकिन, दोनों ओपीडी के मरीजों को यहां बैठने या खड़े होने तक की उचित सुविधा नहीं है। जो बैंच लगे हैं उनपर महज बारह लोग ही बैठ सकते हैं। ऐसे में मंगलवार को लोग भीड़ में ही खड़े रहे। 12:10 बजे जब मेडिसन ओपीडी की तरफ टीम गई तो यहां भी अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी के बाहर सुरक्षा कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। यहां मरीजों की दो कतारें लगी हुई हैं। लेकिन, सामाजिक दूरी का पालन यहां भी नहीं हो रहा है। स्त्री रोग विभाग में 103 महिलाएं उपचार को आईं। यहां दो चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। एमएस डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि सप्ताह के पहले तीन दिनों में मरीजों की अधिक भीड़ रहती है। सुरक्षा कर्मी लोगों को समय-समय पर निर्देश देते हैं। मरीजों को भी नियमों का ध्यान रखना चाहिए। मंगलवार व शुक्रवार को हड्डी रोगों के ऑपरेशन होते हैं।
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एक दूसरे चिकित्सक के पास भेज रहे थे : रविंद्र
बड़सर से आए रविंद्र कुमार ने कहा कि वह सुबह नौ बजे से अस्पताल आए हैं, लेकिन पहले हड्डी रोग ओपीडी में दिखाने के बाद उन्हें सर्जरी ओपीडी में भेज दिया गया। दोनों ओपीडी के चिकित्सक एक दूसरे से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे लिखवाने को कह रहे थे। एक तो भीड़, ऊपर से ओपीडी के अंदर पहुंचना बहुत मुश्किल हो रहा था। ऐसे में परेशानी झेलनी पड़ी।
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बुजुर्गों को बैठने तक की नहीं जगह : सुभाष
गलोड़ के सुभाष ने कहा कि वह अपनी 75 वर्षीय माता को लेकर आए। लेकिन, हड्डी रोग ओपीडी के बाहर भीड़ बहुत थी। बुजुर्ग माता को बैठने तक के लिए जगह नहीं थी। बाकी मरीजों और तीमारदारों की तरह वह भी कतार में ही खड़ी थीं। दस बजे से ओपीडी के बाहर खड़े थे और 98वां नंबर था। 12 बजे तक भी नंबर नहीं आया।
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