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Hamirpur (Himachal) News: पंच भीष्म पर्व पर दीपकों की जोड़ियां बनीं आकर्षण का केंद्र
Sun, 02 Nov 2025 12:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 02 Nov 2025 12:47 AM IST
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पंच भीष्म पर्व पर मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर में रखी गई दीपकों की जोड़ियां। संवाद
सुजानपुर (हमीरपुर)। प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर मुरली मनोहर में पंच भीष्म पर्व पर प्रज्वलित मिट्टी के दीपकों की जोड़ियां श्रद्धा के साथ-साथ आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। श्रद्धालु इन दीपकों के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।
कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा पर संपन्न होने वाला पंच भीष्म पर्व शनिवार से शुरू हो गया। इस पर्व पर वर्षों से मिट्टी के दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित करने की परंपरा आज भी मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर के पंडित रवि नंदन निभा रहे हैं। यह परंपरा उनकी माता विद्या देवी ने लगभग 70 वर्ष पहले शुरू की थी, जिसके उपरांत आज उनका परिवार इस पर्व को दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित कर परंपरा को कायम रखे हुए है।
पुरानी कथाओं के मुताबिक महाभारत में पांडवों की जीत के बाद भगवान श्रीकृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए। भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे आग्रह किया कि पांडवों को ज्ञान प्रदान करें। उस समय मृत्यु शैय्या पर लेटे पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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पितामह ने श्रीकृष्ण के अनुरोध पर पांडवों को राजधर्म, वरुण धर्म और मोक्ष धाम का ज्ञान दिया। भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा यानी 5 दिन तक चलता रहा। पितामह ने ज्ञान दे दिया तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यह पांच दिन मंगलकारी हो गए हैं। इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंच के नाम से जाना जाएगा तथा पंच भीष्म व्रत अत्यंत लाभदायक होगा।
इन पांच दिनों में दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित करना अति शुभ रहता है। इसी परंपरा को मुरली मनोहर मंदिर में आज भी निभाया जा रहा है। वर्तमान में आज 50 जोड़ियां प्रज्वलित की हैं, जो आकर्षक तथा श्रद्धा के केंद्र बनी हुई हैं। मंदिर के पुजारी रवि नंदन ने बताया कि भगवान विष्णु की कथा का गुणगान कर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है तथा 6 नवंबर को इनको पानी में प्रवाह कर दिया जाएगा। इन दिनों में आंवले तथा गन्ने का सेवन करना शुभ समझा जाता है।
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कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा पर संपन्न होने वाला पंच भीष्म पर्व शनिवार से शुरू हो गया। इस पर्व पर वर्षों से मिट्टी के दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित करने की परंपरा आज भी मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर के पंडित रवि नंदन निभा रहे हैं। यह परंपरा उनकी माता विद्या देवी ने लगभग 70 वर्ष पहले शुरू की थी, जिसके उपरांत आज उनका परिवार इस पर्व को दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित कर परंपरा को कायम रखे हुए है।
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पुरानी कथाओं के मुताबिक महाभारत में पांडवों की जीत के बाद भगवान श्रीकृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए। भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे आग्रह किया कि पांडवों को ज्ञान प्रदान करें। उस समय मृत्यु शैय्या पर लेटे पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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पितामह ने श्रीकृष्ण के अनुरोध पर पांडवों को राजधर्म, वरुण धर्म और मोक्ष धाम का ज्ञान दिया। भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा यानी 5 दिन तक चलता रहा। पितामह ने ज्ञान दे दिया तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यह पांच दिन मंगलकारी हो गए हैं। इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंच के नाम से जाना जाएगा तथा पंच भीष्म व्रत अत्यंत लाभदायक होगा।
इन पांच दिनों में दीपक की जोड़ियां प्रज्वलित करना अति शुभ रहता है। इसी परंपरा को मुरली मनोहर मंदिर में आज भी निभाया जा रहा है। वर्तमान में आज 50 जोड़ियां प्रज्वलित की हैं, जो आकर्षक तथा श्रद्धा के केंद्र बनी हुई हैं। मंदिर के पुजारी रवि नंदन ने बताया कि भगवान विष्णु की कथा का गुणगान कर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है तथा 6 नवंबर को इनको पानी में प्रवाह कर दिया जाएगा। इन दिनों में आंवले तथा गन्ने का सेवन करना शुभ समझा जाता है।