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Hamirpur (Himachal) News: लावारिस कुत्तों के झुंड पशुओं के लिए बने खतरा
Sat, 03 Oct 2026 12:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:38 AM IST
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हमीरपुर। जिले में लावारिस कुत्तों का आतंक अब इंसानों के साथ पशुधन के लिए भी चिंता का कारण बनता जा रहा है। कुत्तों के झुंड खेतों और रिहायशी क्षेत्रों के आसपास घूमते रहते हैं और मौका मिलते ही पशुओं पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं।
इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ पशुओं की सुरक्षा की चिंता भी सताने लगी है। पशु विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले में 247 पशु कुत्तों के काटने से घायल हुए थे।
वर्ष 2025-26 में यह संख्या 236 रही, जबकि वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अब तक 148 पशुओं के कुत्तों के हमले में घायल होने के मामले पशु अस्पतालों में दर्ज किए जा चुके हैं। ये आंकड़े केवल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाए गए पशुओं के हैं।
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ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में घायल पशुओं को हर बार अस्पताल नहीं लाया जाता। ऐसे में वास्तविक मामलों की संख्या अधिक होने की संभावना है। पशुपालकों अशोक, दीपक और अनुज सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से लावारिस कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि कुत्तों के बढ़ते झुंड से इंसानों के साथ पशुधन की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
बॉक्स
बछड़े और बकरियां बन रहे निशाना
पशुपालकों के अनुसार लावारिस कुत्तों के झुंड खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास लगातार मंडराते रहते हैं। खासकर छोटे बछड़े, बकरियां और अन्य कमजोर पशु इनके आसान निशाने बन रहे हैं। झुंड में हमला होने पर पशुओं के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है, जिससे पशुपालकों को उपचार पर खर्च के साथ पशुधन के नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।
कोट
लावारिस कुत्तों को एंटी रेबीज टीके लगाए जा रहे हैं। अप्रैल से अब तक 148 पशुओं को कुत्तों ने जख्मी किया है। -डॉ. सतीश वर्मा, सहायक निदेशक (परियोजना), पशुपालन विभाग हमीरपुर
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इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ पशुओं की सुरक्षा की चिंता भी सताने लगी है। पशु विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले में 247 पशु कुत्तों के काटने से घायल हुए थे।
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वर्ष 2025-26 में यह संख्या 236 रही, जबकि वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अब तक 148 पशुओं के कुत्तों के हमले में घायल होने के मामले पशु अस्पतालों में दर्ज किए जा चुके हैं। ये आंकड़े केवल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाए गए पशुओं के हैं।
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ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में घायल पशुओं को हर बार अस्पताल नहीं लाया जाता। ऐसे में वास्तविक मामलों की संख्या अधिक होने की संभावना है। पशुपालकों अशोक, दीपक और अनुज सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से लावारिस कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि कुत्तों के बढ़ते झुंड से इंसानों के साथ पशुधन की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
बॉक्स
बछड़े और बकरियां बन रहे निशाना
पशुपालकों के अनुसार लावारिस कुत्तों के झुंड खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास लगातार मंडराते रहते हैं। खासकर छोटे बछड़े, बकरियां और अन्य कमजोर पशु इनके आसान निशाने बन रहे हैं। झुंड में हमला होने पर पशुओं के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है, जिससे पशुपालकों को उपचार पर खर्च के साथ पशुधन के नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।
कोट
लावारिस कुत्तों को एंटी रेबीज टीके लगाए जा रहे हैं। अप्रैल से अब तक 148 पशुओं को कुत्तों ने जख्मी किया है। -डॉ. सतीश वर्मा, सहायक निदेशक (परियोजना), पशुपालन विभाग हमीरपुर