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आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बनाई जाए स्थायी नीति : खरवाड़ा

Thu, 16 Jan 2020 11:39 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 11:39 PM IST
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नादौन (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने बिजली बोर्ड प्रबंधक वर्ग और राज्य सरकार से मांग की है कि आउटसोर्स पर भर्ती करने की बजाए बिजली बोर्ड के माध्यम से अति शीघ्र भर्ती प्रक्रिया को शुरू किया जाए। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। आउटसोर्स प्रथा एक गैर जिम्मेदार और शोषण आधारित व्यवस्था है। जिसके चलते जहां इन कर्मचारियों को सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन से महरूम रखा जा रहा है। वहीं, इनका ईपीएफ भी इनके खाते में जमा करवाने की बजाए कुछ सर्विस प्रदात्ताओं की ओर से गड़बड़झाला किया जा रहा है। फील्ड में काम कर रहे एक दर्जन से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं या शारीरिक तौर पर शत प्रतिशत अपाहिज हो चुके हैं।
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दुर्घटनाओं का शिकार हुए कर्मचारियों के परिवार जहां दो वक्त की रोटी से महरूम हो रहे हैं वहीं, अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में भी असमर्थ हैं। इन परिवारों को न तो किसी एजेंसी की ओर से इलाज का खर्च दिया जा रहा है, न ही मुआवजा राशि की अदायगी हो पा रही है और न ही ईपीएफ तक की अदायगी हो पा रही है। हाल ही में एक मामला बिजली मंडल ऊना के सब डिविजन संतोषगढ़ का उजागर हुआ है। जिसमें निर्मल सिंह आउटसोर्स कर्मचारी 16 नवंबर को करंट से बुरी तरह से जल गया था। जिसका पीजीआई में दायां बाजू तो कट चुका है और डॉक्टरों की राय के मुताबिक बाएं बाजू को भी काटना पड़ेगा। जिसे परिजनों की मनाही की वजह से अभी तक नहीं काटा गया है। टांग और पांव में भी बड़े-बड़े घाव हैं। निर्मल सिंह के परिवार में बूढ़े मां-बाप, पत्नी, दो लड़के पांचवीं और आठवीं में पढ़ रहे हैं और परिवार में कोई दूसरा कमाने वाला भी नहीं है। जिससे इस परिवार की हालत बहुत ही दयनीय है। यूनियन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और बिजली बोर्ड के प्रबंधक वर्ग से ऐसे बेसहारा हो चुके परिवारों के लिए अति शीघ्र राहत राशि जारी करने, मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजा राशि अदा करने और परिवार से एक सदस्य को बिजली बोर्ड में नौकरी दिए जाने के आदेश अतिशीघ्र जारी करने की मांग की है।
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