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Hamirpur (Himachal) News: आठ माह से लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन बंद
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आठ माह से लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन बंद
पथरी के मरीज टांडा या शिमला जाने के लिए मजबूर
वर्तमान में चीरा लगाकर ऑपरेशन कर रहे विशेषज्ञ
पहले एक दिन में होते जाते थे आठ के करीब ऑपरेशन
अब एक दिन में हो पा रहे हैं केवल तीन ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मेडिकल कॉरपोरेशन और मेडिकल कॉलेज की लेटलतीफी का खामियाजा पथरी के मरीज भुगत रहे हैं। 16 वर्ष पुरानी मशीन आठ माह से खराब है और अब इसकी मरम्मत भी संभव नहीं है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पथरी का ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को वर्तमान में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक मशीन को खराब हुए आठ से नौ माह बीत गए हैं लेकिन अभी तक नई मशीन नहीं आ पाई है। ऐसे में शल्य विभाग के सर्जन चीरा लगाकर ही ऑपरेशन करने के लिए मजबूर हैं। इससे मरीजों को भी ज्यादा दर्द हो रहा है। वहीं लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन करने में सर्जनोंं को भी आसानी होती है। चीरा लगाकर ऑपरेशन करने में अधिक समय की खपत होती है। मेडिकल कॉलेज में सुविधा न मिलने से मरीजों को मजबूरी में शिमला या टांडा की दौड़ लगानी पड़ रही है।
अस्पताल में हर सप्ताह पथरी के 40 के करीब मरीज आते हैं। एक दिन में सर्जन सात से आठ ऑपरेशन करते थे लेकिन अब ऑपरेशन करने में अधिक समय लग रहा है। इससे चिकित्सक भी चार के करीब ही ऑपरेशन कर पा रहे हैं। मरीजों को एक और दो माह बाद का समय ऑपरेशन के लिए दिया जा रहा है जिस कारण मरीज खासे परेशान हैं। मरीजों संजीव कुमार, कमल, गायित्री, निशा आदि ने कहा कि एक तो ऑपरेशन चीरा लगाकर किए जा रहे हैं और लंबी तिथि दी जा रही है। मजबूर होकर मरीजों को निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि इस मुद्दे पर गौर करें और जल्द यहां पर मशीन उपलब्ध करवाई जाए।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मेडिकल कॉरपोरेशन ही यहां के लिए मशीन खरीदेगी।
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पथरी के मरीज टांडा या शिमला जाने के लिए मजबूर
वर्तमान में चीरा लगाकर ऑपरेशन कर रहे विशेषज्ञ
पहले एक दिन में होते जाते थे आठ के करीब ऑपरेशन
अब एक दिन में हो पा रहे हैं केवल तीन ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मेडिकल कॉरपोरेशन और मेडिकल कॉलेज की लेटलतीफी का खामियाजा पथरी के मरीज भुगत रहे हैं। 16 वर्ष पुरानी मशीन आठ माह से खराब है और अब इसकी मरम्मत भी संभव नहीं है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पथरी का ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को वर्तमान में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक मशीन को खराब हुए आठ से नौ माह बीत गए हैं लेकिन अभी तक नई मशीन नहीं आ पाई है। ऐसे में शल्य विभाग के सर्जन चीरा लगाकर ही ऑपरेशन करने के लिए मजबूर हैं। इससे मरीजों को भी ज्यादा दर्द हो रहा है। वहीं लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन करने में सर्जनोंं को भी आसानी होती है। चीरा लगाकर ऑपरेशन करने में अधिक समय की खपत होती है। मेडिकल कॉलेज में सुविधा न मिलने से मरीजों को मजबूरी में शिमला या टांडा की दौड़ लगानी पड़ रही है।
अस्पताल में हर सप्ताह पथरी के 40 के करीब मरीज आते हैं। एक दिन में सर्जन सात से आठ ऑपरेशन करते थे लेकिन अब ऑपरेशन करने में अधिक समय लग रहा है। इससे चिकित्सक भी चार के करीब ही ऑपरेशन कर पा रहे हैं। मरीजों को एक और दो माह बाद का समय ऑपरेशन के लिए दिया जा रहा है जिस कारण मरीज खासे परेशान हैं। मरीजों संजीव कुमार, कमल, गायित्री, निशा आदि ने कहा कि एक तो ऑपरेशन चीरा लगाकर किए जा रहे हैं और लंबी तिथि दी जा रही है। मजबूर होकर मरीजों को निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि इस मुद्दे पर गौर करें और जल्द यहां पर मशीन उपलब्ध करवाई जाए।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मेडिकल कॉरपोरेशन ही यहां के लिए मशीन खरीदेगी।