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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   objection on rice quantity

बोरी में निर्धारित मात्रा से कम निकले चावल, राशन डिपो में हंगामा

Wed, 29 Jan 2020 11:39 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 11:39 PM IST
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हमीरपुर। जिला मुख्यालय के समीप लंबलू राशन डिपो में बुधवार सुबह चावल की बोरियों में निर्धारित मात्रा से कम चावल पाए जाने पर हंगामा हो गया। द कृषि सहकारी सभा लंबलू के प्रधान जसवंत सिंह चौहान और सदस्यों ने बोहणी स्थित प्रदेश फूड एंड सिविल सप्लाई कारपोरेशन के गोदाम के संचालक को डिपो में तलब किया और उसका घेराव किया। संचालक के सामने चावल की बोरियां तोली गईं तो करीब दर्जन भर बोरियों में आठ से दस किलोग्राम चावल कम पाए गए। जबकि, कुछ एक बोरियों में चावल की मात्रा सही पाई गई। पहले से घाटे में चल रहे डिपो की सप्लाई में इस तरह की धांधली होने पर सोसायटी प्रधान और सदस्यों ने रोष जताया है।
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उनका कहना है कि पहले ही डिपो की नीलामी तक की नौबत आ चुकी है। प्रधान व अन्य सदस्य अपने खुद के पैसे से डिपो में राशन उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बारह से पंद्रह हजार रुपये का घाटा पिछले महीने पड़ा है। सोसायटी के पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की धांधली करके कुछ लोग खूब चांदी कूट रहे हैं। वहीं, डिपो में इस तरह के तनावपूर्ण माहौल के बाद राशन लेने आए दर्जनों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। उन्हें राशन के लिए इंतजार करना पड़ा। इस संबंध में जिला खाद्य नियंत्रक हमीरपुर शिवराम राही का कहना है कि मामला सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन वालों का है। हिमाचल प्रदेश फूड एंड सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन हमीरपुर के एरिया मैनेजर पंकज शर्मा ने फोन नहीं उठाया है।
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मामले की होनी चाहिए उच्च स्तरीय जांच : समिति
हिमाचल प्रदेश डिपो संचालक समिति ने इस घटना के बाद सिविल सप्लाई कारपोरेशन के खिलाफ मोरचा खोल दिया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि ने कहा कि वह पूर्व में इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। इसके अलावा विभाग को अनगिनत बार शिकायत कर चुके हैं।
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अशोक कवि ने कहा कि प्रदेश भर के 90 फीसदी डिपुओं में कम राशन पहुंचता है। जिसका खामियाजा डिपो संचालकों को उठाना पड़ रहा है। प्रत्येक राशनकार्ड धारक को तोल कर राशन देना होता है। लेकिन, पीछे से कम राशन निकलने के चलते राशन पूरा करना मुश्किल हो रहा है। सरकार इस मामले की जांच करवाए कि आखिर प्रत्येक बोरी में 5 से 10 किलोग्राम राशन का मुनाफा किसकी जेब में जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक राशन की बोरी पर नंबरिंग होनी चाहिए।
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