फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Number of students increased in government schools during Corona crisis

कोरोना संकटकाल में सरकारी स्कूलों में बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या

Sun, 27 Mar 2022 11:42 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 11:42 PM IST
विज्ञापन
हमीरपुर। कोरोना संकटकाल में स्कूल बंद रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वहीं, नौकरी छूट जाने से सैकड़ों अभिभावकों ने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा दिया है। दो वर्ष कोरोना के साथ लड़ाई के बाद विद्यार्थी नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दो वर्ष कोरोना में कुछेक निजी स्कूल बंद भी हुए हैं।
विज्ञापन

वहीं, प्राइवेट सेक्टर में नौकरी छूटने और निजी स्कूलों में बच्चों की भारी भरकम फीस के चलते अभिभावकों ने काफी संख्या में अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाए हैं। कोरोना काल के दौरान कई अभिवावक बेरोजगार होने के कारण निजी स्कूलों की फीस चुकाने में असमर्थ थे। बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई के लिए स्कूलों में विभिन्न गतिविधियां करवाई जा रही हैं। पुराने पाठ्यक्रम को दोहराया जा रहा है।
विज्ञापन

जिला हमीरपुर में कोराना संक्रमण की पहली लहर के दौरान सत्र 2020-21 में पहली से पांचवीं कक्षा तक 14112 शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इस लहर के बाद अगले सत्र में निजी स्कूलों की फीस और अभिभावकों की आर्थिक हालत खस्ता होने के बाद करीब 1887 विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया। इस कारण सत्र 2021-22 में पहली से पांचवीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में 15999 विद्यार्थी हो गए। वहीं, बड़ी कक्षाओं छठी से बारहवीं तक भी सत्र 2019-20 में 516 तो सत्र 2020-21 में 891 विद्यार्थियों ने प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। सत्र 2019-20 में छठी से बारहवीं कक्षा तक 26619 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में दाखिल थे। पहली लहर के बाद करीब 516 बच्चे निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए। इस कारण सत्र 2020-21 में बच्चों की संख्या 27135 हो गई। दूसरे साल 2021-22 में 892 और विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों से सरकारी में आए।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस कारण छठी से बारहवीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में 28026 विद्यार्थी हो गए हैं। जेबीटी, डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजूकेशन, बीएड और एमएड के अलावा टेट उत्तीर्ण करने के बाद छंटनी परीक्षाओं के माध्यम से प्रशिक्षित स्टाफ को सरकारी स्कूलों में नौकरी मिलती है। कोरोनाकाल में कई सरकारी स्कूलों के अध्यापकों ने घर जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाया। इस कारण भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उप निदेशक संजय ठाकुर ने कहा कि दो वर्ष स्कूल बंद रहने से बच्चे पर काफी प्रभाव पड़ा है। ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चे कुछ एक विषयों को ही सीख पाए हैं। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में दो सालों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को निजी स्कूलों की तर्ज पर पढ़ाने के लिए कहा गया है। दो साल घर पर पढ़ाई करने से बच्चों में काफी परिवर्तन आए हैं। अब स्कूलों में बच्चों को मनोरंजन के साथ तनाव मुुक्त शिक्षा दी जा रही है, ताकि बच्चों का संपूर्ण विकास हो सके। इसी सत्र से नई शिक्षा नीति शुरू हो रही है। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed