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Hamirpur (Himachal) News: अब जम्मू कश्मीर से भी आई शिटाके मशरूम उत्पादन की मांग
Sun, 08 Oct 2023 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 08 Oct 2023 12:58 AM IST
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शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र पालमपुर में उगी मशरूम ब्लाक को दिखाते अधिकारी। (स्रोत : संवाद)
हमीरपुर। अब कृषि विभाग जम्मू कश्मीर ने भी हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थापित शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र से मशरूम के ब्लॉकों की मांग भेजी है। यह ब्लॉक बुरादे और भूसे से ईंट के आकार की बनी हुई हैं। कृषि विभाग जम्मू कश्मीर ने कुल 1000 ब्लॉकों का ऑर्डर भेजा है। एक ब्लॉक 200 रुपये में उपलब्ध करवाया जाता है। बाद में कृषि विभाग जम्मू-कश्मीर इन ब्लॉकों में मशरूम का उत्पादन करेगा। वहीं, किसानों को भी शिटाके मशरूम के उत्पादन के बारे में बताया जाएगा। एक ब्लॉक से औसतन 800 ग्राम से एक किलोग्राम की फसल ली जा सकती है। जाइका प्रोजेक्ट हमीरपुर के तहत पालमपुर में शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है।
यहां किसानों को शिटाके मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, जो प्रशिक्षक हैं उन्हें पूर्व में जापान में इसका प्रशिक्षण दिया गया है। शिटाके मशरूम के उत्पादन के लिए मशीनरी भी जापान से आई है। इसकी कीमत करीब 5.9 करोड़ रुपये है। यह मशीनरी वर्ष 2020 में भारत पहुंची थी। वर्ष 2022 में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में इसका ट्रायल के आधार पर उत्पादन शुरू किया गया। वर्ष 2023 में इसमें सफलता मिली है और विशेषज्ञों के अनुसार जो शिटाके मशरूम का उत्पादन यहां हो रहा है वैसी उत्तम गुणवत्ता वाला मशरूम देश में कहीं अन्य पैदा नहीं होता। इसकी गुणवत्ता जापान में उगने वाली शिटाके मशरूम से भी बेहतर है।
औषधीय गुणों से भरपूर है शिटाके मशरूम
शिटाके का उपयोग कई एशियाई देशों में खाद्य और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। शिटाके मशरूम की खेती के लिए बीज खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन से लिया जाता है। शिटाके मशरूम में पाए जाने वाले लेंटीनन (बायोएक्टिव कंपाउंड) को कई एंटी-ट्यूमर और कैंसररोधी औषधियों में प्रयोग किया जाता है। शिटाके मशरूम का प्रोस्टेट व ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग बहुत से रोगों के लिए औषधि के रूप में जैसे की एड्स, एलर्जी, संक्रमण, फ्लू और जुकाम, मूत्र असंयम को विनियमित करने के साथ-साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है। इसके नियमित सेवन से इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाया जा सकता है। इसमें सेलेनियम और जिंक की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसकी वजह से इस मशरूम का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि शिटाके मशरूम पूरी तरह से प्राकृतिक है और कोई भी रसायन इसके उत्पादन के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मंडी, कुल्लू, कांगड़ा आदि में यह मशरूम साधारण रूप तथा अन्य क्षेत्रों मे कंट्रोल स्ट्रक्चर में पैदा की जा सकती है। इसके लिए 15-25 डिग्री तापमान आवश्यक होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ताजी मशरूम काफी महंगी दरों पर बिकती है। जापान में ताजा शिटाके मशरूम औसतन 5500-6000 रुपये प्रति किलोग्राम है। भारत में 1,200-4500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से शिटाके मशरूम (ताजा) बिकता है और सुखाए गए शिटाके का औसतन मूल्य 450 रुपये प्रति 100 ग्राम है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र पालमपुर में किसानों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि विभाग जम्मू कश्मीर से भी शिताके मशरूम के 1000 ब्लाॅकों का ऑर्डर मिला है। वहीं जो शिटाके मशरूम की गुणवत्ता यहां प्राप्त हो रही है वह पूरे देश में कहीं नहीं है। भविष्य में हर जिले में इसकी उपलब्धता के लिए कार्य किया जाएगा।
-डॉ. सुनील चौहान, परियोजना निदेशक, जाइका हमीरपुर।
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यहां किसानों को शिटाके मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, जो प्रशिक्षक हैं उन्हें पूर्व में जापान में इसका प्रशिक्षण दिया गया है। शिटाके मशरूम के उत्पादन के लिए मशीनरी भी जापान से आई है। इसकी कीमत करीब 5.9 करोड़ रुपये है। यह मशीनरी वर्ष 2020 में भारत पहुंची थी। वर्ष 2022 में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में इसका ट्रायल के आधार पर उत्पादन शुरू किया गया। वर्ष 2023 में इसमें सफलता मिली है और विशेषज्ञों के अनुसार जो शिटाके मशरूम का उत्पादन यहां हो रहा है वैसी उत्तम गुणवत्ता वाला मशरूम देश में कहीं अन्य पैदा नहीं होता। इसकी गुणवत्ता जापान में उगने वाली शिटाके मशरूम से भी बेहतर है।
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औषधीय गुणों से भरपूर है शिटाके मशरूम
शिटाके का उपयोग कई एशियाई देशों में खाद्य और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। शिटाके मशरूम की खेती के लिए बीज खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन से लिया जाता है। शिटाके मशरूम में पाए जाने वाले लेंटीनन (बायोएक्टिव कंपाउंड) को कई एंटी-ट्यूमर और कैंसररोधी औषधियों में प्रयोग किया जाता है। शिटाके मशरूम का प्रोस्टेट व ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग बहुत से रोगों के लिए औषधि के रूप में जैसे की एड्स, एलर्जी, संक्रमण, फ्लू और जुकाम, मूत्र असंयम को विनियमित करने के साथ-साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है। इसके नियमित सेवन से इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाया जा सकता है। इसमें सेलेनियम और जिंक की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसकी वजह से इस मशरूम का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि शिटाके मशरूम पूरी तरह से प्राकृतिक है और कोई भी रसायन इसके उत्पादन के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मंडी, कुल्लू, कांगड़ा आदि में यह मशरूम साधारण रूप तथा अन्य क्षेत्रों मे कंट्रोल स्ट्रक्चर में पैदा की जा सकती है। इसके लिए 15-25 डिग्री तापमान आवश्यक होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ताजी मशरूम काफी महंगी दरों पर बिकती है। जापान में ताजा शिटाके मशरूम औसतन 5500-6000 रुपये प्रति किलोग्राम है। भारत में 1,200-4500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से शिटाके मशरूम (ताजा) बिकता है और सुखाए गए शिटाके का औसतन मूल्य 450 रुपये प्रति 100 ग्राम है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र पालमपुर में किसानों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि विभाग जम्मू कश्मीर से भी शिताके मशरूम के 1000 ब्लाॅकों का ऑर्डर मिला है। वहीं जो शिटाके मशरूम की गुणवत्ता यहां प्राप्त हो रही है वह पूरे देश में कहीं नहीं है। भविष्य में हर जिले में इसकी उपलब्धता के लिए कार्य किया जाएगा।
-डॉ. सुनील चौहान, परियोजना निदेशक, जाइका हमीरपुर।