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केमिस्ट को जारी किया नोटिस, सात दिन में जवाब देने के निर्देश

Tue, 27 Jul 2021 07:42 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 07:42 PM IST
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Notice issued to chemist, instructions to reply in seven days
लंबलू में खड्ड में फेंकी गई दवाइयों की जांच करते दवा निरीक्षक और पुलिस का कर्मचारी। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल लंबलू के समीप खड्ड में एक्सपायर दवाइयां फेंकने के मामले में दवा नियंत्रक विभाग ने जांच शुरू कर दी है। विभाग ने इन दवाइयों को अपने कब्जे में ले लिया है। अब इन दवाइयों के बैच के आधार पर जांच की जा रही है कि यह दवाइयां किस केमिस्ट के पास थीं। प्रारंभिक चरण में इस मामले में आयुर्वेदिक अस्पताल के एक केमिस्ट का नाम भी सामने आया है।
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इसके चलते दवा नियंत्रक विभाग ने केमिस्ट को नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। अमर उजाला ने 25 जुलाई के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और दवाइयों के मामले की पड़ताल शुरू की। बता दें कि एक्सायर दवाइयों को खुले में नहीं फेंका जा सकता। इन्हें वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाता है, लेकिन जिस तरह से लंबलू खड्ड में दवाइयों को फेंका गया, उससे बरसात के मौसम में खड्ड का पानी भी दूषित होने की संभावना रहती है।
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बयान
लंबलू आयुर्वेदिक अस्पताल के नजदीक खड्ड में एक्सपायर दवाइयां बरामद हुई हैं। इस मामले की जानकारी प्रशासन को दी गई है। एक निजी केमिस्ट को इस बारे में नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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दिनेश गौतम, दवा निरीक्षक हमीरपुर।
इनसेट-
खड्डों-नालों में गंदगी की जांच करना विभाग का काम नहीं : सुखदेव
हमीरपुर। लंबलू खड्ड में दवाइयों समेत अन्य गंदगी बरसात के मौसम में गसोता की तरफ बह रही है। गसोता में जलशक्ति विभाग की पेयजल स्कीम है। इस स्कीम से एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के लोगों को पेयजल आपूर्ति होती है। एक्सापयर दवाइयों और गंदगी के कारण गसोता पेयजल स्कीम का पानी दूषित होने की भी संभावना रहती है, लेकिन इस मामले में उचित कार्रवाई करने के बजाय जलशक्ति विभाग लीपापोती में जुटा हुआ है।
जलशक्ति विभाग लंबलू के जूनियर इंजीनियर अंकुश गुप्ता के मोबाइल पर जब कॉल किया तो एसडीओ सुखदेव ने जेई का फोन छीन लिया। एसडीओ ने कहा कि पेयजल स्कीमों के नजदीक नाले या खड्ड में कौन गंदगी फैला रहा है, यह जांचना विभाग का काम नहीं। उधर, दि उपभोक्ता संरक्षण संगठन हमीरपुर के अध्यक्ष एडवोकेट सुशील शर्मा, महासचिव मनोहर लाल कानूनगो और कार्यकारी अध्यक्ष पंकज भारतीय ने कहा कि बरसात के मौसम में पेयजल दूषित होने की संभावना अधिक रहती है। दूषित पेयजल के कारण जलजनित रोग फैल सकते हैं। इसलिए जलशक्ति विभाग को अपनी पेयजल स्कीमों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। वहीं, प्रदेश भाजपा मीडिया सह प्रभारी नरेंद्र अत्री ने कहा कि कहां पानी दूषित हो रहा है और कौन दूषित कर रहा है, यह जांचना जलशक्ति विभाग का काम है। एसडीओ का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है।
हमने नाले-खड्डें नहीं देखनी हैं
जलशक्ति विभाग कहां-कहां नाले पर बैठा रहेगा। हमने पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होती है, नाले-खड्डें नहीं देखनी हैं। जिसने खड्ड में दवाइयां फेंकी हैं, उस अस्पताल प्रबंधन के बारे में कोई सवाल उठा नहीं रहा, अकेले जलशक्ति विभाग से ही सवाल किए जा रहे हैं।

सुखदेव, एसडीओ, जलशक्ति विभाग हमीरपुर।
जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी
एसडीओ हमीरपुर सुखदेव का यह बयान गलत है कि पेयजल स्रोत विभाग ने नहीं देखने होते। कहां पेयजल स्रोत दूषित हो रहा है, यह विभाग का ही काम है। एसडीओ हमीरपुर की ओर से विभाग के जेई अंकुश गुप्ता के हाथों से फोन छीन कर बात करना भी गलत है। इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डॉ. एसके शर्मा, मुख्य अभियंता, जलशक्ति विभाग हमीरपुर।
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