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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Many transferred amid investigation, some stayed at one station for 15 years

Hamirpur (Himachal) News: कई के जांच के बीच तबादले, कोई 15 वर्षों से एक स्टेशन पर डटे

Tue, 01 Apr 2025 05:25 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Apr 2025 05:25 AM IST
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हमीरपुर। सहकारी सभाओं में बीते कुछ वर्षों से करोड़ों रुपये के घोटालों के लिए चर्चित हमीरपुर जिले में सहकारिता विभाग का संचालन ही सवालों में है। हालात ऐसे हैं कि कुछ अधिकारियों के अहम जांच के बीच ही तबादले किए जा रहे हैं तो कइ अधिकारी 15 सालों से एक ही स्टेशन और एक ही कार्यालय में जमे हुए हैं। एक ओर भ्रष्टाचार की परतें खोलने वाले अधिकारियों को तबादले के इनाम मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक स्टेशन पर जमे अधिकारियों पर किसी की नजर ही नहीं है।
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कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसद में पेश स्थायी समिति की 145वीं रिपोर्ट में यह कहा गया है कि एक ही पद पर लंबे समय से जमे अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। आर्थिक मामलों से जुड़े विभागों में यह अधिक संभावना रहती है। सहकारिता विभाग भी अरबों रुपये के टर्नओवर वाली सहकारी सभाओं में निगरानी तंत्र के रूप में कार्य करता है। ऐसे में इस विभाग में अधिकारियों के तबादलों का समय अहम रहता है। अधिक समय तक एक पद पर बने रहे और जांच के बीच एक वर्ष के भीतर ही दो दफा तबादला आदेश जारी होना विभाग की कार्यशैली को सवालों में लाता है। संसद में मौजूदा सत्र में पेश स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि अधिकतर विभागों में रोटेशन पॉलिसी का पालन नहीं हो रहा है, जिससे चलते भ्रष्टाचार की संभावना अधिक है। इस रिपोर्ट का संजीदा उदाहरण सहकारिता विभाग हमीरपुर में देखने का मिल रहा है। जहां बल्कि वर्षों नहीं बल्कि दशकों से अधिकारी जमे हुए हैं।
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आर्थिक मामलों की निगरानी का जिम्मा अधिकारियों पर
सहकारिता विभाग में आर्थिक मामलों की निगरानी का जिम्मा अधिकारियों पर रहता है। बेशक सहकारी सभाओं के हाउस को ऑडिटर तय करने का अधिकार मिल गया है लेकिन सहकारिता विभाग के अधिकारियों की भूमिका अहम रहती है। इन अधिकारियों की मुस्तैदी ही लोगों की खून पसीने की बचत को सुरक्षित रखने में अहम है। हमीरपुर जिले में 250 से अधिक सहकारी सभाएं हैं, जिनका टर्नओवर अरबों रुपये है, लेकिन यहां पर विभाग की मुस्तैदी से घोटाले सवाल बन कर बार-बार सामने आ रहे हैं।
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तय समय के बाद अधिकारियों का तबादला होना स्वाभाविक है। जांच प्रभावित न हो, इसका ध्यान विभाग की ओर से रखा जाता है। हर घोटाले की नियमों के तहत जांच की जाती है।
-आरके पुरूथी, पंजीयक, सहकारिता विभाग
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