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Hamirpur (Himachal) News: जहां सरकारी सिस्टम रुका, वहां से आगे बढ़ गईं लता
Thu, 10 Jul 2025 12:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 10 Jul 2025 12:56 AM IST
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लता डोगरा।
हमीरपुर। सरकारी कार्यालय में फाइलें अटकती रहती हैं। निजी स्तर पर मंजूरियां भी आती-जाती रहती हैं, लेकिन अगर संकल्प पक्का हो तो बदलाव खुद रास्ता बना लेता है। यही कर दिखाया है नगर निगम हमीरपुर के वार्ड नंबर आठ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र वृत्त दो की कार्यकर्ता लता डोगरा ने।
जहां वर्षों से लंबी सरकारी प्रक्रिया और बजट की देरी ने आंगनबाड़ी केंद्र की दशा बिगाड़ रखी थी, वहां लता ने समुदाय का सहयोग लेकर केंद्र की तस्वीर बदल दी। दो वर्ष पहले जब लता को केंद्र संचालन के लिए कच्चा किराये का कमरा मिला तो वहां बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों के लिए जरूरी सुविधाओं का घोर अभाव था।
हालत ये थी कि अभिभावक अपने बच्चों को भेजने से कतराने लगे, और बच्चों की संख्या दो तक सिमट गई। सरकारी इंतजार में समय गंवाने के बजाय लता डोगरा ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने वार्ड और आसपास के लोगों को केंद्र की महत्ता समझाई और सुविधाएं जुटाने की अपील की।
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लोगों ने भी दिल खोलकर साथ दिया। कई लोगों ने रंग-बिरंगी कुर्सियां, मैट्स, खिलौने तो कुछ ने टेबल, चार्ट, घड़ी, अलमारी और प्रेशर कुकर जैसे उपयोगी सामान दान में दिए। बाद में केंद्र को सुरक्षित पक्के भवन में स्थानांतरित किया गया। जैसे ही सुविधाएं बढ़ीं, अभिभावकों का भरोसा भी लौटा, और अब केंद्र में बच्चों की संख्या दो से बढ़कर 12 हो चुकी है।
सहायिका कृष्णा देवी बच्चों को पौष्टिक भोजन देती हैं, जबकि लता डोगरा उन्हें पढ़ाने और गतिविधियों में व्यस्त रखने का कार्य करती हैं। डेढ़ से तीन वर्ष तक के बच्चे रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक केंद्र में आते हैं।
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जहां वर्षों से लंबी सरकारी प्रक्रिया और बजट की देरी ने आंगनबाड़ी केंद्र की दशा बिगाड़ रखी थी, वहां लता ने समुदाय का सहयोग लेकर केंद्र की तस्वीर बदल दी। दो वर्ष पहले जब लता को केंद्र संचालन के लिए कच्चा किराये का कमरा मिला तो वहां बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों के लिए जरूरी सुविधाओं का घोर अभाव था।
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हालत ये थी कि अभिभावक अपने बच्चों को भेजने से कतराने लगे, और बच्चों की संख्या दो तक सिमट गई। सरकारी इंतजार में समय गंवाने के बजाय लता डोगरा ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने वार्ड और आसपास के लोगों को केंद्र की महत्ता समझाई और सुविधाएं जुटाने की अपील की।
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लोगों ने भी दिल खोलकर साथ दिया। कई लोगों ने रंग-बिरंगी कुर्सियां, मैट्स, खिलौने तो कुछ ने टेबल, चार्ट, घड़ी, अलमारी और प्रेशर कुकर जैसे उपयोगी सामान दान में दिए। बाद में केंद्र को सुरक्षित पक्के भवन में स्थानांतरित किया गया। जैसे ही सुविधाएं बढ़ीं, अभिभावकों का भरोसा भी लौटा, और अब केंद्र में बच्चों की संख्या दो से बढ़कर 12 हो चुकी है।
सहायिका कृष्णा देवी बच्चों को पौष्टिक भोजन देती हैं, जबकि लता डोगरा उन्हें पढ़ाने और गतिविधियों में व्यस्त रखने का कार्य करती हैं। डेढ़ से तीन वर्ष तक के बच्चे रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक केंद्र में आते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लता डोगरा।