{"_id":"5de947c98ebc3e54d0320447","slug":"joa-candidate-angry-hamirpur-hp-news-sml3166647116","type":"story","status":"publish","title_hn":"हड़ताल पर बैठे जेओए अभ्यर्थियों से विधायक राणा ने की मुलाकात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हड़ताल पर बैठे जेओए अभ्यर्थियों से विधायक राणा ने की मुलाकात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग कार्यालय के बाहर पिछले सात दिनों से हड़ताल पर बैठे जूनियर आफिसर असिस्टेंट भर्ती में बाहर हुए अभ्यर्थियों से वीरवार को सुजानपुर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा ने मुलाकात की। मौके पर पहुंचे विधायक ने सभी अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनीं और उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे को धर्मशाला में विस के शीतकालीन सत्र में सरकार के समक्ष जोरशोर से उठाएंगे। पोस्ट कोड-556 जेओए के दर्जनों अभ्यर्थी पिछले एक हफ्ते से चयन आयोग हमीरपुर के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। लेकिन, सरकार और विभाग के किसी भी नुमाइंदे ने अभी तक इनकी सुध नहीं ली है। विधायक राणा ने कहा कि इन हजारों अभ्यर्थियों के साथ सरकार अन्याय कर रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2014 में जूनियर आफिस असिस्टेंट (जेओए) के 447 पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी तथा वर्ष 2017 में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई। हालांकि, वर्ष 2016 में इन पदों के लिए अनिवार्य कंप्यूटर ज्ञान पर सवाल उठे थे तथा सरकार ने कैबिनेट की बैठक में कमेटी गठित कर उनके हक में फैसला सुनाया था। वर्ष 2016 में ही उन्हीं सेवा एवं नियमों के तहत जेओए के 1126 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका परिणाम फरवरी, 2019 में घोषित किया तथा 500 पद ही भरे। जबकि, 650 पद रिक्त रह गए। रिजल्ट घोषित करने से पहले किसी संबद्ध प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर कोर्स करने की बेवजह शर्त जोड़ी गई, जोकि बिल्कुल गलत है। क्योंकि शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा पास रखी गई है। इसके लिए भी आयोग पिछली भर्ती प्रक्रिया में कैबिनेट की ओर से गठित कमेटी के निर्णय को दरकिनार कर स्वयं ऐसे निर्णय ले रही है, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना है। उन्होंने कहा कि एक ही पदनाम के लिए 2 साल के अंतराल में भर्ती प्रक्रिया तो शुरू हुई लेकिन, आरएंडपी रुल्ज में बिना मतलब का बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे भी अभ्यर्थी हैं जोकि 45 साल की उम्र पार करने वाले हैं, लेकिन मामले को सुलझाने की बजाय लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार को युवाओं के भविष्य से खेलने नहीं देगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2014 में जूनियर आफिस असिस्टेंट (जेओए) के 447 पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी तथा वर्ष 2017 में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई। हालांकि, वर्ष 2016 में इन पदों के लिए अनिवार्य कंप्यूटर ज्ञान पर सवाल उठे थे तथा सरकार ने कैबिनेट की बैठक में कमेटी गठित कर उनके हक में फैसला सुनाया था। वर्ष 2016 में ही उन्हीं सेवा एवं नियमों के तहत जेओए के 1126 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका परिणाम फरवरी, 2019 में घोषित किया तथा 500 पद ही भरे। जबकि, 650 पद रिक्त रह गए। रिजल्ट घोषित करने से पहले किसी संबद्ध प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर कोर्स करने की बेवजह शर्त जोड़ी गई, जोकि बिल्कुल गलत है। क्योंकि शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा पास रखी गई है। इसके लिए भी आयोग पिछली भर्ती प्रक्रिया में कैबिनेट की ओर से गठित कमेटी के निर्णय को दरकिनार कर स्वयं ऐसे निर्णय ले रही है, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना है। उन्होंने कहा कि एक ही पदनाम के लिए 2 साल के अंतराल में भर्ती प्रक्रिया तो शुरू हुई लेकिन, आरएंडपी रुल्ज में बिना मतलब का बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे भी अभ्यर्थी हैं जोकि 45 साल की उम्र पार करने वाले हैं, लेकिन मामले को सुलझाने की बजाय लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार को युवाओं के भविष्य से खेलने नहीं देगी।
विज्ञापन