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नए श्रम कानून में यूनियन बनाना भी कठिन : सीटू
Sun, 06 Jul 2025 12:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 06 Jul 2025 12:41 AM IST
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हमीरपुर। सीटू की अखिल भारतीय कमेटी और नौ अन्य केंद्रीय यूनियनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के आह्वान पर नौ जुलाई, 2025 को केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ प्रदेश के हर जिला में प्रदर्शन किया जाएगा। इस हड़ताल में प्रदेश के हजारों मजदूर, बीमा, बैंक कर्मचारी शामिल होंगे।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने कोरोना काल में मजदूरों के 44 श्रम कानूनों को चार श्रम कोड में बदल दिया। इनमें से 12 श्रम कानून तो बिल्कुल खत्म कर दिए। श्रम कोड में नए प्रावधानों के अनुसार यूनियन बनाना कठिन कर दिया है और यूनियन बन भी जाए तो मजदूरों को धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने पर पाबंदियां लगाकर मजदूरों के खिलाफ फौजदारी मुकदमे बनाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह कदम देश में अघोषित आपातकाल की शुरुआत है। केंद्र सरकार ने विभागों व कारखानों में पक्के किस्म के रोजगार खत्म कर दिए और उनकी जगह ट्रेनी अपरेंटिस, फिक्स्ड टर्म रोजगार आउटसोर्स आदि का प्रावधान किया गया है। कारखानों में मजदूरों की आठ घंटे के बजाय 12 घंटे की ड्यूटी का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार आंगनबाड़ी, मिड-डे मील वर्कर्स आशा वर्कर्स को भी नियमित तौर पर मानदेय देने में विफल रही है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आंगनबाड़ी वर्कर्स हेल्पर्स को ग्रेच्युटी देने के मामले में केंद्र व राज्य सरकार दोनों मौन हैं। केंद्र सरकार ने मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को काम नही मिल रहा। जिन क्षेत्रों में काम मिल भी रहा है, केंद्र सरकार अपना न्यूनतम वेतन का हिस्सा राज्य सरकार को नहीं दे रही है। उन्होंने मजदूरों से आह्वान किया है कि नौ जुलाई की हड़ताल को सफल बनाकर भारत सरकार को करारा जवाब दें।
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सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने कोरोना काल में मजदूरों के 44 श्रम कानूनों को चार श्रम कोड में बदल दिया। इनमें से 12 श्रम कानून तो बिल्कुल खत्म कर दिए। श्रम कोड में नए प्रावधानों के अनुसार यूनियन बनाना कठिन कर दिया है और यूनियन बन भी जाए तो मजदूरों को धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने पर पाबंदियां लगाकर मजदूरों के खिलाफ फौजदारी मुकदमे बनाने का प्रावधान किया गया है।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह कदम देश में अघोषित आपातकाल की शुरुआत है। केंद्र सरकार ने विभागों व कारखानों में पक्के किस्म के रोजगार खत्म कर दिए और उनकी जगह ट्रेनी अपरेंटिस, फिक्स्ड टर्म रोजगार आउटसोर्स आदि का प्रावधान किया गया है। कारखानों में मजदूरों की आठ घंटे के बजाय 12 घंटे की ड्यूटी का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार आंगनबाड़ी, मिड-डे मील वर्कर्स आशा वर्कर्स को भी नियमित तौर पर मानदेय देने में विफल रही है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आंगनबाड़ी वर्कर्स हेल्पर्स को ग्रेच्युटी देने के मामले में केंद्र व राज्य सरकार दोनों मौन हैं। केंद्र सरकार ने मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को काम नही मिल रहा। जिन क्षेत्रों में काम मिल भी रहा है, केंद्र सरकार अपना न्यूनतम वेतन का हिस्सा राज्य सरकार को नहीं दे रही है। उन्होंने मजदूरों से आह्वान किया है कि नौ जुलाई की हड़ताल को सफल बनाकर भारत सरकार को करारा जवाब दें।