{"_id":"632609c2737d420adc697f1f","slug":"ignoring-roster-system-in-promotion-of-head-teachers-bhatia-hamirpur-hp-news-sml422047326","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्य अध्यापकों की पदोन्नति में रोस्टर प्रणाली की अनदेखी : भाटिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्य अध्यापकों की पदोन्नति में रोस्टर प्रणाली की अनदेखी : भाटिया
विज्ञापन
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ओंकार सिंह ने बताया कि 12 सितंबर 2022 को जारी मुख्य अध्यापकों की पदोन्नति सूची में अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित शिक्षकों की मुख्य अध्यापकों के पदों पर पदोन्नति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। इस सूची में लगभग 250 टीजीटी को मुख्याध्यापक बनाया गया है। यह सभी सामान्य वरिष्ठता सूची से पदोन्नत हुए हैं। इनमें कोई भी रोस्टर प्रणाली विभाग ने नहीं लगाई है।
इसमें जो अनुसूचित जाति से संबंधित कुछ टीजीटी पदोन्नत हुए हैं, वे रोस्टर प्रणाली के अंतर्गत नहीं आते। 12 सितंबर 2022 की सूची में रोस्टर प्रणाली लागू नहीं की गई है। भाटिया ने बताया कि 3 दिसंबर 2021 को जो सूची शिक्षा विभाग ने मुख्य अध्यापकों की जारी की थी, जिसमें 277 टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था, उसमें भी कोई रोस्टर प्रणाली लागू नहीं है। दोनों जारी सूचियों में लगभग 527 टीजीटी को मुख्याध्यापक बनाया गया। लेकिन, उसमें से जो रोस्टर के तहत सीटें आरक्षित श्रेणी को मिलनी चाहिए थीं, वह नहीं दी गईं। दोनों सूचियों में लगभग 75 के करीब अनुसूचित जाति के टीजीटी को पदोन्नति मिलनी चाहिए थी, लेकिन शिक्षा विभाग ने मनमाने नियम बनाकर इन वर्गों को पदोन्नति से वंचित किया है। जो प्रमोशन की सूची 17 दिसंबर 2020 को जारी हुई थी, उसमें 269 टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था।
केवल इस लिस्ट में रोस्टर प्रणाली के तहत 42 अनुसूचित जाति के टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था। भाटिया ने कहा कि इस तरह की पदोन्नति सूचियां भारत के संविधान की धारा 164 (क) की खुली अवमानना है। भाटिया ने शिक्षा निदेशक से आग्रह किया है कि वह इन सूचियों कि दोबारा समीक्षा करे तथा शीघ्र ही जो बैकलॉग से संबंधित पद बनते हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से भरने के आदेश जारी करें। भाटिया ने बताया कि महासंघ का शिष्टमंडल इस बात को लेकर शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री तथा शिक्षा निदेशक से मिलेगा तथा उन्हें तथ्यों से अवगत करवाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसमें जो अनुसूचित जाति से संबंधित कुछ टीजीटी पदोन्नत हुए हैं, वे रोस्टर प्रणाली के अंतर्गत नहीं आते। 12 सितंबर 2022 की सूची में रोस्टर प्रणाली लागू नहीं की गई है। भाटिया ने बताया कि 3 दिसंबर 2021 को जो सूची शिक्षा विभाग ने मुख्य अध्यापकों की जारी की थी, जिसमें 277 टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था, उसमें भी कोई रोस्टर प्रणाली लागू नहीं है। दोनों जारी सूचियों में लगभग 527 टीजीटी को मुख्याध्यापक बनाया गया। लेकिन, उसमें से जो रोस्टर के तहत सीटें आरक्षित श्रेणी को मिलनी चाहिए थीं, वह नहीं दी गईं। दोनों सूचियों में लगभग 75 के करीब अनुसूचित जाति के टीजीटी को पदोन्नति मिलनी चाहिए थी, लेकिन शिक्षा विभाग ने मनमाने नियम बनाकर इन वर्गों को पदोन्नति से वंचित किया है। जो प्रमोशन की सूची 17 दिसंबर 2020 को जारी हुई थी, उसमें 269 टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था।
विज्ञापन
केवल इस लिस्ट में रोस्टर प्रणाली के तहत 42 अनुसूचित जाति के टीजीटी को मुख्य अध्यापक बनाया गया था। भाटिया ने कहा कि इस तरह की पदोन्नति सूचियां भारत के संविधान की धारा 164 (क) की खुली अवमानना है। भाटिया ने शिक्षा निदेशक से आग्रह किया है कि वह इन सूचियों कि दोबारा समीक्षा करे तथा शीघ्र ही जो बैकलॉग से संबंधित पद बनते हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से भरने के आदेश जारी करें। भाटिया ने बताया कि महासंघ का शिष्टमंडल इस बात को लेकर शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री तथा शिक्षा निदेशक से मिलेगा तथा उन्हें तथ्यों से अवगत करवाएगा।
विज्ञापन