{"_id":"630667335332030f9f7e440f","slug":"horticulture-department-and-nauni-university-jointly-prepare-nursery-dr-chandel-hamirpur-hp-news-sml4194020109","type":"story","status":"publish","title_hn":"बागवानी विभाग और नौणी विवि संयुक्त रूप से तैयार करें नर्सरी : डॉ. चंदेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बागवानी विभाग और नौणी विवि संयुक्त रूप से तैयार करें नर्सरी : डॉ. चंदेल
विज्ञापन
उद्यानिकी महाविद्यालय नेरी में पुस्तकों का विमोचन करते विवि के कुलपति डॉ. चंदेल।
- फोटो : Hamirpur-HP
रंगस (हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर की ओर से हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग के तत्वावधान में एशियन बैंक की ओर से वित्त पोषित प्रदेश शिवा परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के हित धारकों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय तकनीकी युग का है और हमें अपने बच्चों को खेती की तरफ मोड़ना होगा। हमें अपनी आमदनी को ही नहीं बढ़ाना बल्कि अधिक से अधिक भूमि पर पौधरोपण भी करना है। प्राथमिक खेती को बढ़ावा देने के साथ पैदावार करने वाले से उसका उपयोग करने वाले तक की चेन को भी पहचानना होगा, ताकि किसान को उसके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिल सके।
डॉ. चंदेल ने बागवानी विभाग और नौणी विश्वविद्यालय को संयुक्त रूप से नर्सरी तैयार करने की सलाह दी। एचपी शिवा परियोजना के निदेशक डॉ. देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना की संरचना प्रदेश के सात जिलों में की गई है। 28 खंडों में 28 हजार हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक विधि से सघन पद्धति के उद्यान स्थापित किए जाएंगे। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के डीन एवं टीम लीडर डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि सभी फलों की पौष्टिकता एक जैसी ही होती है, लेकिन फलों को बाजार में कम कीमत मिलती है।
विज्ञापन
इसके लिए एचपी शिवा परियोजना एक संजीवनी के रूप में कार्य कर रही है। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर नेरी कॉलेज के वैज्ञानिकों की ओर से लिखित तीन पुस्तकों का विमोचन किया। वैज्ञानिकों ने हिमाचल प्रदेश में आम की खेती, अनार की खेती, कुपोषण फल पौधशाला पुस्तक लिखी है। मुख्य अतिथि ने प्रगतिशील किसानों को उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की तरफ से एवोकैडो के पौधों का वितरण भी किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आने वाला समय तकनीकी युग का है और हमें अपने बच्चों को खेती की तरफ मोड़ना होगा। हमें अपनी आमदनी को ही नहीं बढ़ाना बल्कि अधिक से अधिक भूमि पर पौधरोपण भी करना है। प्राथमिक खेती को बढ़ावा देने के साथ पैदावार करने वाले से उसका उपयोग करने वाले तक की चेन को भी पहचानना होगा, ताकि किसान को उसके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिल सके।
विज्ञापन
डॉ. चंदेल ने बागवानी विभाग और नौणी विश्वविद्यालय को संयुक्त रूप से नर्सरी तैयार करने की सलाह दी। एचपी शिवा परियोजना के निदेशक डॉ. देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना की संरचना प्रदेश के सात जिलों में की गई है। 28 खंडों में 28 हजार हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक विधि से सघन पद्धति के उद्यान स्थापित किए जाएंगे। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के डीन एवं टीम लीडर डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि सभी फलों की पौष्टिकता एक जैसी ही होती है, लेकिन फलों को बाजार में कम कीमत मिलती है।
विज्ञापन
इसके लिए एचपी शिवा परियोजना एक संजीवनी के रूप में कार्य कर रही है। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर नेरी कॉलेज के वैज्ञानिकों की ओर से लिखित तीन पुस्तकों का विमोचन किया। वैज्ञानिकों ने हिमाचल प्रदेश में आम की खेती, अनार की खेती, कुपोषण फल पौधशाला पुस्तक लिखी है। मुख्य अतिथि ने प्रगतिशील किसानों को उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की तरफ से एवोकैडो के पौधों का वितरण भी किया।