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Hamirpur (Himachal) News: फायर सीजन के लिए वन विभाग ने किया रैपिड रिस्पांस टीम का गठन
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शीघ्र फायर वॉचरों की भी होंगी नियुक्तियां, आग पर काबू करने का करेंगे कार्य
हर वर्ष प्रदेश में वनों की लाखों-करोड़ों की वन संपदा हो जाती है राख
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। फायर सीजन शुरू होते ही वन विभाग ने फायर फाइटिंग टीम यानी रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया है। शीघ्र ही सभी वन बीटों में फायर वाचर भी नियुक्त कर दिए जाएंगे ताकि वनों में आग लगने पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण पाया जा सके। हर वर्ष प्रदेश के तहत वनों की लाखों-करोड़ों की वन संपदा जलकर राख होती है। उसकी वजह से वन विभाग के अतिरिक्त लाखों की सरकारी या निजी संपत्ति भी आग की भेंट चढ़ जाती है। अचानक रात को आग लगने पर कई प्रकार के पक्षी, जंगली जानवर और अन्य जीव जंतु भी जलकर राख हो जाते हैं। फायर सीजन को लेकर वन रेंज नादौन मुख्यालय में कार्यरत डिप्टी रेंजर सुरेश कुमार ने कहा कि फायर सीजन 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है जो 15 जून तक पीक पर रहेगा। इसलिए विभाग की ओर से फायर फाइटिंग टीम यानी रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया गया है। शीघ्र ही वन परिक्षेत्र नादौन के तहत आने वाली 13 वन बीटों में एक-एक फायर वाचर स्थानीय लोगों में से ही नियुक्त कर दिए जाएंगे। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों का सहयोग भी जरूरत पड़ने पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीम को इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया होता है कि आग को नियंत्रित करने के लिए पहले मैन्युअल आधार पर प्रयास करें। फिर भी आग पर काबू न होता दिखे तो काउंटर फायर के जरिये आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास करना चाहिए। पानी की सहायता या फिर फायर फाइटिंग वाहन जैसे फायर ब्रिगेड को कॉल करके हर हाल में आग पर काबू पाना होता है। आबादी क्षेत्र के साथ लगते वनों में आमतौर पर जहां स्थानीय लोग विभाग का सहयोग भी करते हैं। वहीं, कई बार आग लगने का कारण भी बन जाते हैं। विभाग की टीम एवं फायर वॉचरों को ऐसे लोगों पर भी नजर रखने की जरूरत होती है।
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हर वर्ष प्रदेश में वनों की लाखों-करोड़ों की वन संपदा हो जाती है राख
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। फायर सीजन शुरू होते ही वन विभाग ने फायर फाइटिंग टीम यानी रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया है। शीघ्र ही सभी वन बीटों में फायर वाचर भी नियुक्त कर दिए जाएंगे ताकि वनों में आग लगने पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण पाया जा सके। हर वर्ष प्रदेश के तहत वनों की लाखों-करोड़ों की वन संपदा जलकर राख होती है। उसकी वजह से वन विभाग के अतिरिक्त लाखों की सरकारी या निजी संपत्ति भी आग की भेंट चढ़ जाती है। अचानक रात को आग लगने पर कई प्रकार के पक्षी, जंगली जानवर और अन्य जीव जंतु भी जलकर राख हो जाते हैं। फायर सीजन को लेकर वन रेंज नादौन मुख्यालय में कार्यरत डिप्टी रेंजर सुरेश कुमार ने कहा कि फायर सीजन 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है जो 15 जून तक पीक पर रहेगा। इसलिए विभाग की ओर से फायर फाइटिंग टीम यानी रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया गया है। शीघ्र ही वन परिक्षेत्र नादौन के तहत आने वाली 13 वन बीटों में एक-एक फायर वाचर स्थानीय लोगों में से ही नियुक्त कर दिए जाएंगे। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों का सहयोग भी जरूरत पड़ने पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीम को इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया होता है कि आग को नियंत्रित करने के लिए पहले मैन्युअल आधार पर प्रयास करें। फिर भी आग पर काबू न होता दिखे तो काउंटर फायर के जरिये आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास करना चाहिए। पानी की सहायता या फिर फायर फाइटिंग वाहन जैसे फायर ब्रिगेड को कॉल करके हर हाल में आग पर काबू पाना होता है। आबादी क्षेत्र के साथ लगते वनों में आमतौर पर जहां स्थानीय लोग विभाग का सहयोग भी करते हैं। वहीं, कई बार आग लगने का कारण भी बन जाते हैं। विभाग की टीम एवं फायर वॉचरों को ऐसे लोगों पर भी नजर रखने की जरूरत होती है।