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Hamirpur (Himachal) News: प्रदेश की नासाज आर्थिक सेहत सुधारने के लिए सरकारी तंत्र भी संजीदा नहीं
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हजारों का मासिक बिजली बिल देने वाले प्लांट से नहीं ली जा रही ऑक्सीजन
कार्यालयों से गायब रहते हैं साहब, चलते रहते हैं पंखे और बल्ब
बिजली बिल की देनदारी करोड़ों में, सरकार पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। प्रदेश की नासाज आर्थिक सेहत के लिए सरकार के साथ प्रशासन का तंत्र भी कुछ हद तक जिम्मेवार है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में भी सरकारी तंत्र संजीदा नहीं है। समय वीरवार 12 बजे हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग कार्यालय का यह परिसर है। अधिकारी कमरे में नहीं हैं तथा कमरे की लाइटें और पंखे चले हुए हैं। बल्ब भी जल रहा है। यह उस कार्यालय का हाल है जिसकी बिजली बोर्ड को हजारों रुपये की देनदारी है। हालांकि, ये अधिकारी कार्यालय के ही दूसरे हिस्से में काम से गए थे। जाते समय न ही लाइटें बंद की गईं और न पंखे। अधिकारी एक बजे तक नहीं लौटे हैं।
स्थान मेडिकल कॉलेज हमीरपुर। समय दो बजे। यहां पर 800 एलएमपी ऑक्सीजन प्लांट बिजली की खपत से चल रहा है लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई का वार्ड में प्रयोग नहीं किया जा रहा है। प्लांट के चलने से हर माह मेडिकल कॉलेज को चाली से पचास हजार का बिल आता है। जबकि सप्लाई नहीं ली जा रही है। यहां पर यह ऑक्सीजन प्लांट कोरोना काल में लगाया गया था। उसके बाद यहां पर इसकी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यहां पर ऑक्सीजन सिलिंडर भी काफी हैं। ऐसे में यह प्लांट औपचारिकता के लिए संचालित तो किया जा रहा है लेकिन इसकी पाइपलाइन के जरिये वार्डों में ऑक्सीजन नहीं ली जा रही है। तर्क यह दिया जा रहा है कि ऑक्सीजन की जरूरत पूरी हो रही है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को बिजली बोर्ड का एक करोड़ रुपये से अधिक बिल चुकता करना है। कई विभागों के बिजली, पानी के लाखों रुपये के बिल देने को हैं। कई विभागों में बिना इस्तेमाल के ही मशीनों को ऑन करके रखा गया है। इससे एक और बिल की देनदारी बढ़ रही है, दूसरी ओर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। कई कर्मचारी घंटों तक कमरों से बाहर रहते हैं लेकिन कमरों के पंखे, एसी, बल्ब जल रहे होते हैं।
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कार्यालयों से गायब रहते हैं साहब, चलते रहते हैं पंखे और बल्ब
बिजली बिल की देनदारी करोड़ों में, सरकार पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। प्रदेश की नासाज आर्थिक सेहत के लिए सरकार के साथ प्रशासन का तंत्र भी कुछ हद तक जिम्मेवार है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में भी सरकारी तंत्र संजीदा नहीं है। समय वीरवार 12 बजे हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग कार्यालय का यह परिसर है। अधिकारी कमरे में नहीं हैं तथा कमरे की लाइटें और पंखे चले हुए हैं। बल्ब भी जल रहा है। यह उस कार्यालय का हाल है जिसकी बिजली बोर्ड को हजारों रुपये की देनदारी है। हालांकि, ये अधिकारी कार्यालय के ही दूसरे हिस्से में काम से गए थे। जाते समय न ही लाइटें बंद की गईं और न पंखे। अधिकारी एक बजे तक नहीं लौटे हैं।
स्थान मेडिकल कॉलेज हमीरपुर। समय दो बजे। यहां पर 800 एलएमपी ऑक्सीजन प्लांट बिजली की खपत से चल रहा है लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई का वार्ड में प्रयोग नहीं किया जा रहा है। प्लांट के चलने से हर माह मेडिकल कॉलेज को चाली से पचास हजार का बिल आता है। जबकि सप्लाई नहीं ली जा रही है। यहां पर यह ऑक्सीजन प्लांट कोरोना काल में लगाया गया था। उसके बाद यहां पर इसकी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यहां पर ऑक्सीजन सिलिंडर भी काफी हैं। ऐसे में यह प्लांट औपचारिकता के लिए संचालित तो किया जा रहा है लेकिन इसकी पाइपलाइन के जरिये वार्डों में ऑक्सीजन नहीं ली जा रही है। तर्क यह दिया जा रहा है कि ऑक्सीजन की जरूरत पूरी हो रही है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को बिजली बोर्ड का एक करोड़ रुपये से अधिक बिल चुकता करना है। कई विभागों के बिजली, पानी के लाखों रुपये के बिल देने को हैं। कई विभागों में बिना इस्तेमाल के ही मशीनों को ऑन करके रखा गया है। इससे एक और बिल की देनदारी बढ़ रही है, दूसरी ओर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। कई कर्मचारी घंटों तक कमरों से बाहर रहते हैं लेकिन कमरों के पंखे, एसी, बल्ब जल रहे होते हैं।
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