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बिजली बोर्ड लिमिटेड को 17 माह बाद भी स्थायी एमडी नहीं मिला : खरवाड़ा
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विद्युत बोर्ड पेंशनर फोरम इकाई नादौन की बैठक में लंबित मांगों पर चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
नादौन (हमीरपुर)। विद्युत बोर्ड पेंशनर फोरम इकाई नादौन की बैठक रविवार को अध्यक्ष राजकुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में इकाई के सचिव विधि चंद सनौरिया, कोषाध्यक्ष प्रिथी चंद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगत राम सहित काफी संख्या में पेंशनरों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से उपस्थित विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि विद्युत बोर्ड का प्रबंधक वर्ग पेंशनरों, कर्मचारियों और बोर्ड के हितों की पैरवी करने में विफल रहा है। यही वजह है कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर कई माह तक ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट जैसे वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे है। संशोधित वेतनमान की बकाया राशि के 50-50 हजार रुपये की पहली किस्त और 20 प्रतिशत संशोधित ग्रेच्युटी की बकाया राशि का भुगतान भी अधिकतर पेंशनरों को नहीं हो पाया है। 01-01-2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सरकार के आदेशों के मुताबिक आयु सीमा के आधार पर बकाया राशि का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। बिजली बोर्ड लिमिटेड का सरकारी विभागों, औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं के पास 355 करोड़ रुपये फंसे हैं। इसकी उगाही के प्रति प्रबंधक वर्ग गंभीर नहीं है। बोर्ड को 17 माह के बाद स्थायी प्रबंध निदेशक नहीं मिल सका है। विद्युत बोर्ड लिमिटेड के पेंशनरों के वित्तीय लाभ बिना किसी देरी के जारी किए जाएं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नादौन (हमीरपुर)। विद्युत बोर्ड पेंशनर फोरम इकाई नादौन की बैठक रविवार को अध्यक्ष राजकुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में इकाई के सचिव विधि चंद सनौरिया, कोषाध्यक्ष प्रिथी चंद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगत राम सहित काफी संख्या में पेंशनरों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से उपस्थित विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि विद्युत बोर्ड का प्रबंधक वर्ग पेंशनरों, कर्मचारियों और बोर्ड के हितों की पैरवी करने में विफल रहा है। यही वजह है कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर कई माह तक ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट जैसे वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे है। संशोधित वेतनमान की बकाया राशि के 50-50 हजार रुपये की पहली किस्त और 20 प्रतिशत संशोधित ग्रेच्युटी की बकाया राशि का भुगतान भी अधिकतर पेंशनरों को नहीं हो पाया है। 01-01-2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सरकार के आदेशों के मुताबिक आयु सीमा के आधार पर बकाया राशि का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। बिजली बोर्ड लिमिटेड का सरकारी विभागों, औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं के पास 355 करोड़ रुपये फंसे हैं। इसकी उगाही के प्रति प्रबंधक वर्ग गंभीर नहीं है। बोर्ड को 17 माह के बाद स्थायी प्रबंध निदेशक नहीं मिल सका है। विद्युत बोर्ड लिमिटेड के पेंशनरों के वित्तीय लाभ बिना किसी देरी के जारी किए जाएं।